सावधान! शोध से खुलासा मां के गर्भ में बच्चों तक फैल रहा जीका वायरस का संक्रमण

Uttam Kumar, Last updated: Mon, 8th Nov 2021, 12:45 PM IST
  • बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के शोधकर्ता ने जीका वायरस संक्रमण पर एक महत्वपूर्ण स्टडी की है. जिसका प्रकाशन अंतरराष्ट्रीय पत्रिका मॉलिक्यूलर न्यूरोबायोलॉजी में किया गया है.  प्रो. सुनीत के. सिंह के अनुसार गर्भवती महिला को जीका वायरस के संक्रमण से बचना चाहिए क्योंकि गर्भावस्था के दौरान जीका का संक्रमण मां से बच्चे में फैल सकता है. 
प्रतिकात्मसक फोटो. 

वाराणसी. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय(Banaras Hindu universities) के आयुर्विज्ञान संस्थान (IMS-BHU) ने राज्य में फैल रहे जीका वायरस संक्रमण के बीच एक इस पर एक महत्वपूर्ण स्टडी की है. जिसका प्रकाशन अंतरराष्ट्रीय पत्रिका मॉलिक्यूलर न्यूरोबायोलॉजी (Molecular Neurobiology) में किया गया है. इसमें दावा किया की यह स्टडी जीका वायरस के संक्रमण को समझने और इससे जुड़ी चिकित्सीय विकास में काफी मददगार साबित होगी. बीएचयू के मॉलिक्यूलर बायोलॉजी विभाग के हेड और प्रसिद्ध वायरोलॉजिस्ट(virologist) प्रो. सुनीत के. सिंह के अनुसार जीका वायरस संक्रमण के बाद ज्यादातर लोगों में इसके लक्षण विकसित नहीं होते हैं. जीका वायरस में संक्रमण की ऊष्मायन अवधि (संक्रमण होने से पहला लक्षण दिखने तक की अवधि) 2- 7 दिनों तक रहती है. 

प्रो. सुनीत के. सिंह के अनुसार 2015 में ब्राजील, उत्तरी अमेरिका, प्रशांत और दक्षिण-पूर्व एशिया में जीका वायरस फैला था. जिसमें करीब 1.5 मिलियन लोग संक्रमित हुए थे और 3,500 से अधिक बच्चों में माइक्रोसेफली मामले दर्ज किए गए थे. वहीं भारत में साल 2018 में जीका वायरस के 157 सकारात्मक मामले दर्ज हुए थे. मौजूदा समय में जीका वायरस के खिलाफ कोई निश्चित एंटीवायरल नहीं हैं. न हीं जीका वायरस का कोई सफल टीका बन पाया है. जिक्स वायरस के टीके बनाई जा रही है जो अलग- अलग स्टेज में है. 

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अभी जीका संक्रमण का इलाज संक्रमित रोगियों में दिख रहे लक्षण(symptomatic treatment) के अनुसार किया जाता है. जीका संक्रमण गुइलेन-बैरे सिंड्रोम( Guillain-Barre syndrome) न्यूरोपैथी (neuropathy) और मायलाइटिस(myelitis) जैसी बीमारियों को ट्रिगर करने का काम करता है. गर्भवती महिला को जीका वायरस के संक्रमण से बचना चाहिए क्योंकि गर्भावस्था के दौरान जीका का संक्रमण मां से बच्चे में फैल सकता है. जिससे कारण बच्चों में माइक्रोसेफली (सामान्य सिर के आकार से छोटा) और बच्चे में अन्य जन्मजात विकृतियां हो सकती हैं, जिसे सामूहिक रूप से जन्मजात जीका सिंड्रोम (congenital Zika syndrome) के नाम से जाना जाता है. 
जबकि वयस्कों(Adult) में जीका संक्रमण के कारण हल्का-बुखार, सिरदर्द, कॉनजकटीवाइटीस (conjunctivitis), जोड़ों में दर्द और शरीर पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखते हैं. जीका वायरस संक्रमण की पहचान रक्त(blood test), मूत्र(urine test) और वीर्य(sperm test) जांच से पता लगाया जा सकता है.

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