किसानों की इनकम और फसल की पैदावार बढ़ाएंगे BHU के वैज्ञानिक, चल रही रिसर्च

Smart News Team, Last updated: Mon, 13th Sep 2021, 5:21 PM IST
  • बीएचयू के वैज्ञानिक रिसर्च के जरिए वाराणसी के गांवों के किसानों को कृषि की उन्नत तकनीक सिखाएंगे और आमदनी बढाने में उनकी मदद करेंगे. उत्तर प्रदेश काउंसिल आफ एग्रीकल्चर रिसर्च के तहत चार साल की इस योजना के लिए राज्य सरकार ने करीब 1.57 करोड़ राशि स्वीकृत कर दी है.
किसानों की इनकम और फसल की पैदावार बढ़ाएंगे BHU के वैज्ञानिक, चल रही रिसर्च (फाइल फोटो)

वाराणसी. बीएचयू के वैज्ञानिक वाराणसी के गांवों के किसानों को कृषि की उन्नत तकनीक के गुर सिखाएंगे और आमदनी बढाने में उनकी मदद करेंगे. फसलों की उपज बढ़ाने के साथ प्रोसेसिंग की भी व्यवस्था की जाएगी. इसके लिए तीन गांवों के एक हजार हेक्टेयर खेत की भूमि का उपयोग किया जाएगा. यह कार्य प्रदेश सरकार की उपकार (उत्तर प्रदेश काउंसिल आफ एग्रीकल्चर रिसर्च) योजना के तहत होंगे. इसके लिए बीएचयू ने बजट का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा. धनराशि मिलते ही वैज्ञानिक काम शुरू कर देंगे.

कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू के विज्ञानी चकिया-चंदौली के तीन गांवों टकटकपुर, गढ़वा दक्षिण व भीषमपुर के किसानों की कृषि उपज बढ़ाने के साथ ही उनके उत्पादों को मार्केट सेक्टर से जोड़ेंगे. वैज्ञानिक कृषि और संबद्ध गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ ही किसानों को उत्तम तकनीक और आय बढ़ाने के बारे में सहायता और सलाह भी देंगे. इसके लिए तीनों गांवों के करीब 1000 हेक्टेयर खेत क्लस्टर बनाकर उनमें माडल के रूप में पूरी तकनीक का उपयोग किया जाएगा. क्लस्टर में एक आइटी हब भी बनाया जाएगा, ताकि सूचना तकनीक के माध्यम से परियोजना की लखनऊ से भी निगरानी की जा सके. इसके लिए रिमोट सेंसिंग की व्यवस्था होगी.

हैवान बने पति ने बीच सड़क पत्नी पर चाकू से किए ताबड़तोड़ वार, फिर...

यह सारे कार्य वैज्ञानिक,उत्तर प्रदेश काउंसिल आफ एग्रीकल्चर रिसर्च के तहत करेंगे. चार साल की इस योजना के लिए राज्य सरकार ने करीब 1.57 करोड़ राशि स्वीकृत कर दी है. वहीं बीएचयू की ओर से पहली किस्त के रूप में 40 लाख का बजट बनाकर शनिवार को भेजा गया. धनराशि आते ही वैज्ञानिक काम शुरू कर देंगे. प्रो. चंदौला ने बताया कि परियोजना के तहत हर घर मशरूम उत्पादन की योजना बनाई गई है. किसानों को मशीनरी एवं नई तकनीक दी जाएगी. इसके बाद सरसों, गेहूं व धान के भी अधिक उत्पादन वाले बीज दिए जाएंगे. खेती संग गांवों में मधुमक्खी, बकरी, भेड़, पोल्ट्री, मछली पालन से भी किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास होगा.

विंध्य क्षेत्र में बैगन, टमाटर, मिर्च की उपज बढ़ाने के साथ प्रोसेसिंग की व्यवस्था की जाएगी. इसके लिए गांवों में प्रोसेसिंग सेंटर बनाया जाएगा. इन क्षेत्रों में ड्रैगन फ्रूट विकसित किया जाएगा. एसिड लाइन बनाई जाएगी, जिसमें नीबू की खेती होगी. अनार व अमरूद की खेती को भी बढ़ाया जाएगा.

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें