रामराज्य की गांधियन को बीएचयू करेगा श्री राम शोध पीठ की स्थापना

Smart News Team, Last updated: Mon, 22nd Feb 2021, 3:48 PM IST
  • रामराज्य की गांधियन को विकसित करने के लिए बीएचयू ने अपने परिसर में श्री राम शोध पीठ की स्थापना करने का निर्णय लिया है. इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है. शासन की स्वीकृति मिलते ही बीएचयू परिसर में श्री राम शोध पीठ स्थापना का काम शुरू करा दिया जाएगा.
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय

वाराणसी: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय के तहत श्री राम शोध पीठ की स्थापना का निर्णय लिया गया है. इसके लिए 10 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया है. इसके अलावा पीठ को आधुनिक संसाधनों से लैस करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से 3.5 करोड़ रुपए की धनराशि का अतिरिक्त बजट भी तैयार किया गया है. इसमें श्रीराम संबंधित पुस्तकालय भवन उपकरण पदों के प्रति माह खर्च और किताब एवं पत्रिकाओं का मुद्रण का भुगतान अतिरिक्त बजट से ही किया जाएगा. इसके लिए सामाजिक विज्ञान संकाय की ओर से प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है. 6 भेजो के इस प्रस्ताव में एक परामर्शदाता समिति के गठन पर भी विचार किया गया है. 

इस समिति में बीएचयू के कुलपति और सामाजिक विज्ञान संकाय के प्रमुख शामिल किए जा सकते हैं. यही समिति श्री राम शोध पीठ के संचालन और वित्तीय दायित्वों का कार्य संभालेगी. बीएचयू के सामाजिक विज्ञान संकाय में अब श्रीराम शोध पीठ स्थापित करने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है. इस पीठ के तहत रामराज्य की गांधियन और अन्य मॉडलों पर अध्ययन अध्यापन किया जाएगा. इस संबंध में बीएचयू के सामाजिक विज्ञान संकाय के प्रमुख कौशल किशोर मिश्रा ने बताया कि राम राज्य के वास्तविक महत्व और रहस्यों पर से पर्दा उठाने के लिए श्रीराम शोध पीठ पर शोध कार्य किए जाएंगे. शासन प्रशासन के लिए समाज में एक नैतिक और चारित्रिक व्यवस्था को स्थापित करने का मूल मंत्र भी तैयार किया जाएगा. 

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परहित और परोपकार से आगे बढ़कर इस पीठ में यह बताया जाएगा कि कर्तव्य से अधिकार का जन्म किस प्रकार होता है. इस पीठ का मुख्य उद्देश्य रामराज्य के वास्तविक थीम को अकादमिक जगत से जोड़ना है. जिससे श्रीराम पर बेहतर से बेहतर शोध और अध्ययन हो और उसका परिष्कृत स्वरूप जनता के सामने आए. उन्होंने बताया कि राम राज्य की अवधारणा के अनुसार सामाजिक न्याय व्यवस्था अर्थ तंत्र वर्ण व्यवस्था सामाजिक एवं राजनीतिक कर्तव्य सांस्कृतिक संपन्नता कला एवं शिल्प शिक्षण व्यवस्था नारी विमर्श आदि इस शोध पीठ के प्रमुख टॉपिक होंगे.

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