कोरोना महामारी में छोड़ा सदियों पुराना रिवाज, ईसाई समाज अब अस्थिकलश को कर रहा दफन

Smart News Team, Last updated: Fri, 14th May 2021, 8:42 AM IST
  • ईसाई समाज ने कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने ने के लिए अपना सदियों पुराना रिवाज छोड़ दिया है. वही अब वह कोरोना संक्रमित मरीज को पहले श्मशान घाट में दाह संस्कार करते है. फिर उसकी अस्थियों को ले जाकर कब्रिस्तान में दफन कर रहे है.
ईसाई धर्म में कोरोना संक्रमित से मृत हुए लोगों की अस्थियां कब्रिस्तान में दफन किया रहा है

वाराणसी. कोरोना माहमारी के कारण कुछ धर्मों को अपने सदियों पुराने रीति रिवाज को छोड़ना पड़ रहा है. वही वह ऐसा कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए भी कर रहे है. वही पहली बार ऐसा हुआ है कि सभी धर्मों के प्रार्थना घरों में प्रतीकात्मक पूजा, इबादत, बन्दगी किया जा रहा है. वही कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए ईसाई समाज ने तो अपना सदियों पुराना रीति रिवाज भी छोड़ दिया है. 

जिसके तहत अब ईसाई समाज कोरोना संक्रमण से हुई मृतकों को सीधे कब्रिस्तान नहीं ले जा रहा है, बल्कि पहले उन शवों को श्मशान घाट या सीएनजी चालित शवदाह गृहों में ले जाकर दाह संस्कार किया जा रहा है. उसके बाद उनकी अस्थियों को कब्रिस्तान ले जाकर दफनाया जा रहा है. वही इस तरह से वाराणसी में ईसाई धर्म के पांच परिवारों ने अपने परिजनों का अंतिम संस्कार किया. 

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वही इसके बारे में बनारस के क्रिश्चियन सेमेट्री बोर्ड के सचिव फादर विजय शांतिराज ने बताया. उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए शवों को सीधे कब्रिस्तान या चर्च नहीं ले जाया जा रहा है. वही कब्रिस्तान में दफन करने से पहले मरीज के परिजन पहले हरिश्चंद्र घाट पर शवों का दाह संस्कार करते है. उसके बाद उनकी अस्थियों को लेकर कब्रिस्तान ले जाते है और फिर उन्हें दफन किया जा रहा है. 

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आपको बता दे कि ईसाई धर्म में यह परंपरा है कि जब किसी की मौत हो जाती है तो उसके शव को ताबूत में रखकर चर्च ले जाकर प्रार्थना की जाती है. वही कई लोग घर पर ही अपने परिजन के शव पर ही रखकर मृतक की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते है. उसके बाद वह कब्रिस्तान ले जाकर उन्हें दफन कर देते है.

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