प्रकाशन घोटाले की गुत्थी सुलझाने में ईओडब्ल्यू नाकाम, बयानों में उलझा जांच दल

Smart News Team, Last updated: 16/12/2020 01:17 AM IST
  • संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में पांडुलिपियों एवं ग्रंथों के प्रकाशन को लेकर शासन की ओर से भेजी गई ग्रांट के घोटाले की जांच कर रहा आर्थिक अपराध अनुसंधान संस्थान यानी ईओडब्ल्यू पूरी तरह नाकाम साबित हो गया है. घोटाले के सभी आरोपियों के अब तक जांच दल की ओर से बयान भी दर्ज नहीं किए जा सके हैं. 
प्रकाशन घोटाले की गुत्थी अभी तक नई सुलझी

वाराणसी .बता दें कि शासन की ओर से साल 2001 से लेकर 2010 के बीच दुर्लभ पांडुलिपियों के प्रकाशन के लिए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को 10 करोड़ 20 लाख 22000 रुपए की धनराशि प्रकाशन के नाम पर निर्गत की गई थी. आरोप है कि इन पांडुलिपियों का प्रकाशन कराए बगैर ही उक्त धनराशि में से 6 करोड़ 53 लाख 23000 763 रुपए का फर्जी तरीके से प्रिंटर्स को भुगतान कर दिया गया. इस फर्जीवाड़े में विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति प्रोफेसर वी कुटुंब शास्त्री के हस्ताक्षर वह फर्जी मोहर का इस्तेमाल किया गया. 

इस प्रकाशन मामले की जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान संस्थान ईओडब्ल्यू को सौंपी गई. जांच एजेंसी को डब्लू ने जांच कार्य शुरू करते ही सबसे पहले तत्कालीन कुलपति के अलावा वित्त अधिकारी के साथ ही लेखा विभाग के 15 कर्मचारियों को नोटिस जारी कर बयान दर्ज कराने का निर्देश दिया था.

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लेखा विभाग के सभी कर्मचारियों के जांच एजेंसी ने बयान तो दर्ज कर लिए हैं किंतु जांच एजेंसी की ओर से नोटिस जारी करने के बाद भी अब तक तत्कालीन कुलपति एवं तत्कालीन वित्त अधिकारी ने अपने बयान दर्ज नहीं कराए हैं. अपने बयानों में लेखा विभाग के ज्यादातर कर्मचारियों ने इस घोटाले में अपना हाथ होने से इनकार किया है. वही नोटिस के बाद भी अब तक बयान दर्ज कराने को उपस्थित ना होने वाले तत्कालीन पूर्व कुलपति प्रोफेसर वी कुटुंब शास्त्री और वित्त अधिकारी के बयान लेने को अब जांच दल ईओडब्ल्यू ने उनसे सीधे संपर्क करने का निर्णय लिया है.

इस संबंध में जांच एजेंसी के निरीक्षक विश्वजीत प्रताप सिंह ने बताया कि बगैर ग्रंथों के प्रकाशन के करोड़ों रुपए के घोटाले की जांच लगभग पूरी हो गई है. जिस फर्जी मोहर के आधार पर भुगतान किया गया उसकी गुत्थी अब तक नहीं सुलझ पाई है. तत्कालीन कुलपति और वित्त अधिकारी के बयान के बाद स्थिति काफी कुछ साफ हो जाएगी. जल्द ही इनके बयान दर्ज कर लिए जाएंगे.

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