काशी-दिल्ली हाईस्पीड रेल कॉरिडोर पर पहले चरण का काम खराब मौसम की भेंट चढ़ गया

Smart News Team, Last updated: Mon, 14th Dec 2020, 4:23 PM IST
दिल्ली से वाराणसी के बीच हाईस्पीड रेल कॉरिडोर पहले चरण में सर्वे का काम शुरू होते ही खराब मौसम के कारण रुक गया. यह काम भूमि के सर्वे के लिए होता है. जिसके चलते सही आकलन कर लिया जाता है. यदि ऐसा हो जाए तो फिर दूसरे चरण में टेंडर उठते हैं. फिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो जाती है.  
(तस्वीर: हाईस्पीड ट्रैन)

वाराणसी: काशी से दिल्ली के बीच हाई स्पीड रेल कॉरिडोर पर काम शुरू होते ही पहले दिन रविवार को थम गया. जिसका कारण खराब मौसम रहा. दरअसल, पहले चरण में एरियल लिडार सर्वे का कार्य इस कॉरिडोर पर होना था. जिसके लिए लगी एनएचएसआरसीएल की टीम ने शाम तक इंतजार भी किया. मगर कोई परिणाम नहीं निकल सका. आपको बता दें कि बीते शनिवार को मुरादाबाद मण्डल में हेलीकॉप्टर से सर्वे कर तैयारी जांची गई थी. अफसोस की बात यह रही कि अभी तक सही स्थिति का आंकलन सामने नहीं आ सका है.

एरियल लिडार बोल यह है जिसमें लाइट डिटेक्शन और रेजिंग का काम तकनीकी आधार पर किया जाता है. जिससे रेल कॉरिडोर की भूमि का सही आंकलन हो पाता है. इस प्रक्रिया में तकनीकी उपकरण के जरिए सही सर्वेक्षण आंकड़ा, लेज़र आंकड़ा, जीपीएस, उड़ान और तस्वीरों को इकट्ठा किया जाता है. यदि ये प्रक्रिया पूरी होती है तो इसके लिए टेंडर निकाले जाते है, जो पीपीपी मॉडर पर आधारित होते हैं.

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वहीं, एनएचएसआरसीएल अधिकारियों की मानें तो एरियल लिडार दो प्रकार से काम करते हैं. पहला तो यह होता है जिसमें मैदान का विवरण लिया जाता है. इसके बाद आए हुए डेटा की प्रोसेसिंग, ड्राइंग और फिर सबसे आखिर में सबको व्यवस्थित तरीके से मिलाया जाता है. उन्होंने बताया कि इस कॉरिडोर में 9 प्वाइंट हैं, जिनका इस्तेमाल कर 86 मास्टर कंट्रोल प्वाइंट और 350 सेकेंडरी कंट्रोल प्वाइंट लगाए जाएंगे.

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