सादगी और ईमानदारी की प्रतिमूर्ति थे पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री

Smart News Team, Last updated: Fri, 6th Aug 2021, 6:47 AM IST
  • भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि पर स्मृतियों को ताजा करते हुए उनकी सादगी और ईमानदारी की सराहना की गई. शास्त्री जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्हें देश का सबसे निष्ठावान सिपाही बताया गया.
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री

वाराणसी. भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पर स्मृतियों को ताजा करते हुए उनकी सादगी और ईमानदारी की सराहना की गई. शास्त्री जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्हें देश का सबसे निष्ठावान सिपाही बताया गया.

मौका था भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि का, इस मौके पर बनारस के लाल और देश के रतन लाल बहादुर शास्त्री के आवास पर संस्कृति विभाग एवं भारतीय जन जागरण समिति के संयुक्त तत्वाधान में 55 वी पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि और भजन गायन का आयोजन किया गया. 

इस मौके पर मौजूद विचारकों ने पूर्व प्रधानमंत्री को सादगी और ईमानदारी की प्रतिमूर्ति बताया. उनके जीवन से जुड़े स्मृतियों को याद करते हुए संस्कृति विभाग ने कहा कि आज के दौर में लोग पद और प्रतिष्ठा का लोग नहीं छोड़ पा रहे हैं जबकि शास्त्री जी ने प्रधानमंत्री कार्यकाल में भी अपने पद को लेकर दंभ नहीं किया. उनकी सादगी की पहचान इतिहास के पन्नों में दर्ज है. स्वतंत्रता आंदोलन में जब वे जेल गए तब उनकी पत्नी चुपके से उनके लिए दुआ में छुपा कर जेल में ले गई. इस पर वे खुश होने के बजाय उनके खिलाफ धरने पर बैठ गए. इसे उनकी ईमानदारी और सादगी ही कहेंगे कि कैदियों को जेल के बाहर की कोई चीज खाना कानून के खिलाफ है इसको लेकर वह अपने पत्नी का भी विरोध किया.

 शास्त्री जी के जीवन में नैतिकता की बात करें तो स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जेल में निरुद्ध शास्त्री जी को सूचना मिली कि उनकी बेटी बीमार है. इस पर जेल प्रशासन की ओर से उन्हें 15 दिन के पैरोल पर छोड़ दिया गया. लेकिन 15 दिन होन पूरे होने से पहले ही उनकी बेटी स्वर्ग सिधार गई तो वह पैरोल की अवधि पूरा होने से पहले ही जेल वापस लौट आए. अपने जीवन काल में परिवहन मंत्री के तौर पर उन्होंने इस क्षेत्र में महिलाओं को प्रवेश दिया.

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