ज्ञानवापी मस्जिद मामले में बहस के बाद जिला जज ने फैसला रखा सुरक्षित

Smart News Team, Last updated: Wed, 21st Oct 2020, 12:10 AM IST
  • ज्ञानवापी मामले को लेकर जिला जज की कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से दायर की दलील के बाद कोर्ट ने फैसले को सुरक्षित रख लिया है.
ज्ञानवापी मामले में जिला कोर्ट ने फैसले को सुरक्षित रख लिया है.

वाराणसी. अयोध्या के राम मंदिर पर फैसले के बाद मथुरा और वाराणसी की लड़ाई तेज हो गई है. ज्ञानवापी मामले पर जिला कोर्ट में दोनों पक्ष ने अपनी दलीलें पेश कीं.  कोर्ट में बहस के बाद इस पर आगे सुनवाई होगी या नहीं इस फैसले को जिला जज ने सुरक्षित रख लिया गया है. 

इस मामले की सुनवाई में काशी विश्वनाथ की ओर से विजय शंकर रस्तोगी, आरपी पांडेय, अमरनाथ शर्मा, सनील रस्तोगी ने कोर्ट में दलीलें पेश कीं. वहीं यूपी सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर मोहम्मद तौफीक ने पक्ष रखा. आपको बता दें कि काशी विश्वनाथ मंदिर पक्ष के वकील का ये दावा है कि ज्ञानवापी मस्जिद ही पुराना काशी विश्वनाथ मंदिर है. जिस पर हिंदुओ का हक है और वो उन्हें मिलना चाहिए. दावों के बीच ज्ञानवापी पक्ष के वकील मंदिर पक्ष के दावे को खारिज कर रहे है.

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अंजुमन इंतजामिया और सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड की दलील पेश करते हुए कहा कि अवर न्यायालय को ज्ञानवापी मामले की सुनवाई का अधिकार नहीं है. बल्कि सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड लखनऊ को सुनवाई का अधिकार है. वहीं काशी विश्वनाथ मंदिर की तरफ से दलील में कहा गया कि अवर न्यायालय के अंतरिम आदेश के खिलाफ निगरानी याचिका सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत दाखिल नहीं की जा सकती है.

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काशी विश्वनाथ मंदिर की ओर से अवर न्यायालय में आवेदन देकर कहा गया था कि ज्ञानवापी परिसर का पुरातत्विक सर्वेक्षण कराया जाए ताकि साबित हो सके कि वहां शिवलिंग पहले से है. इसके अलावा काशी विश्वनाथ मंदिर ने परिसर में पूजा-पाठ की अनुमति मांगी है. इसी के खिलाफ अंजुमन इंतजामिया ने याचिका दायर की थी जबकि यूपी सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड ने निगरानी दाखिल की है. जिस पर देरी की वजह से तीन हजार विलम्ब का जुर्माना लगाया गया है. जिसके बाद अब इस पर आदेश आना अभी बाकी है.   

 

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