वाराणसी: बीएचयू में भी बनेगा हिंदी निदेशालय, बढ़ाएगा राजभाषा का गौरव

Smart News Team, Last updated: 05/12/2020 05:40 PM IST
  • निदेशालय स्थापित करने का निर्णय पिछले साल 12 अप्रैल को ही ले लिया गया था, लेकिन किन्हीं कारणों से इस पर काम आगे नहीं बढ़ सका. अब दिसंबर के अंत तक निदेशालय की स्थापना कर दी जाएगी.
बीएचयू 

वाराणसी. हिंदी भाषा का गौरव बढ़ाने के लिए जल्दी ही बीएचयू में भारत का दूसरा हिंदी निदेशालय स्थापित हो जाएगा.इसके बाद अब बीएचयू में भी तमाम एकेडमिक व बेसिक पुस्तकों का प्रकाशन शुरू हो जाएगा. इस दौरान निदेशालय के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे सामाजिक विज्ञान संकाय के प्रमुख प्रो. कौशल किशोर मिश्रा ने बताया कि यूजीसी ने संस्तुति दे दी है. 

प्रो. कौशल के मुताबिक जल्द ही इस सबंधी आधारभूत संरचना तैयार कर बीएचयू द्वारा देश में हिंदी के गौरव को बढ़ाया जाएगा. शुरूआती में दस लाख रुपये से एलडी गेस्ट हाउस के सामने इसका कार्यालय बनाया जाएगा. बता दें कि निदेशालय को स्थापित करने का निर्णय पिछले साल 12 अप्रैल को ही ले लिया गया था, लेकिन किन्हीं कारणों से इस पर काम आगे नहीं बढ़ सका.अब दिसम्बर के अंत तक निदेशालय की स्थापना कर दी जाएगी.

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देखा जाए तो डीयू के बाद बीएचयू में देश का दूसरा हिंदी निदेशालय स्थापित होगा. शुक्रवार को बीएचयू में कुलपति प्रो. राकेश भटनागर की अध्यक्षता में राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठक की गई.बैठक में इससे जुड़े कई अहम फैसले लिए गए हैं. बैठक में प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए राजभाषा प्रकोष्ठ के प्रमुख विचित्रसेन गुप्त ने कहा कि सेंट्रल लाइब्रेरी में एक राजभाषा विंग भी स्थापित की जाए, जिससे सूचना प्राप्त करने में आसानी होगी. बैठक में उन्होंने राजभाषा नीति के अनुरूप हिंदी पदों के सृजन के लिए मंत्रालय और यूजीसी से अनुरोध किया. इसके अलावा उन्होंने यूनिवर्सिटी के राजभाषा प्रकोष्ठ को लिपिक उपलब्ध कराना, हिंदी में मौलिक पुस्तक लेखन पर पुरस्कार योजना के बारे में भी कहा.प्रो. राकेश भटनागर ने इस पर अपनी सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी में हिंदी के कामकाज में लगातार वृद्धि हो रही है, उसके बाद भी भारत के राजभाषा विभाग के दिए गए लक्ष्यों को सौ फीसद प्राप्त करने के लिए और भी प्रयास किए जाए. बैठक में कुलसचिव नीरज त्रिपाठी सहित कई लोग मौजूद रहे.

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