22 फरवरी से शुरू होगा कबीरचौरा महोत्सव, मूलगादी की दीवारें खोलेगी भेद

Smart News Team, Last updated: Sun, 21st Feb 2021, 2:36 PM IST
  • महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ और काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में कबीर चौरा महोत्सव आगामी 22 फरवरी से शुरू होगा. इसको लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है.
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वाराणसी. बता दें कि एक मुस्लिम जुलाहे परिवार में जन्मे कबिरा कैसे संत कबीर बने. उनके जीवन के रहस्य और उनके संत बनने तक के पड़ावों को जन जन तक पहुंचाने के लिए काशी हिंदू विश्वविद्यालय और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने संयुक्त रूप से महोत्सव आयोजित करने का निर्णय लिया है. आगामी 22 फरवरी से कबीर चौरा महोत्सव का आयोजन कर कर पेंटिंग के माध्यम से संत कबीर दास के जीवन के रहस्य को प्रदर्शित किया जाएगा. महोत्सव की तैयारी काशी हिंदू विश्वविद्यालय और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के ललित कला संकाय के छात्रों की टीम कर रही है. यह टीम संत कबीर दास के जीवन से जुड़े रहस्य को कैनवास में उतार कर पेंटिंग बना रही है. पेंटिंग बनाने में ललित कला संकाय के 15 छात्र छात्राएं जुटे हुए हैं.

इन छात्रों का नेतृत्व काशी विद्यापीठ के ललित कला संकाय प्रमुख डॉक्टर सुनील विश्वकर्मा और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व कला छात्र सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रविंद्र सहाय कर रहे हैं. डॉक्टर सहाय बताते हैं कि अब तक छात्रों की ओर से 10 पेंटिंग्स तैयार कर ली गई है. 2 पेंटिंग्स पर अभी काम चल रहा है. सभी पेंटिंग्स 22 फरवरी से पहले पूरी करा ली जाएंगी. उन्होंने बताया कि छात्रों द्वारा बनाई जा रही पेंटिंग्स में कबीर के लहरतारा में जन्म लेने से लेकर गौना करा कर लौट रहे नीरू नीमा द्वारा अपने घर तक उन्हें लाए जाने, उनके नामकरण, खतना की तैयारियों के बीच तूफान, स्वामी रामानंद से शिष्यत्व ग्रहण, ध्रुव प्रहलाद की भक्ति कथाओंं से प्रेरणा ग्रहण, संत रैदास का सानिध्य, सत्संग सत्संग व उपदेश आदि प्रसंगों को भावपूर्ण चित्रों में उतारकर पेंटिंग्स बनाई गई है. 

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महोत्सव के बारे में जानकारी देते हुए मूलगादी कबीर मठ के महंत आचार्य विवेक दास बताते हैं कि छात्रों द्वारा तैयार की जा रही इन पेंटिंग्स को परिसर मेंस्थित कबीर की हाईटेक झोपड़ी से लेकर निर्माणाधीन कबीर की बगिया तक सजाया जाएगा. उन्होंने बताया कि झोपड़ी के मुख्य द्वार से ऐतिहासिक हुए और साधना स्थली तक को नए रूप में सजाया जा रहा है. बताया की झोपड़ी में प्रवेश करते ही बाल कबीर की वाणी गुजरेगी जिसमें स्वागत के शब्द होंगे और उनका पूरा जीवन वर्णन भी उन्हीं की वाणी के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा.

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