ज्ञानवापी मस्जिद प्रकरण: कोर्ट का आदेश- अपने खर्चे पर खुदाई करे ASI

Smart News Team, Last updated: 08/04/2021 04:27 PM IST
  • ज्ञानवापी मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए आर्कोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया को खुदाई करने को आदेश दिया है. इसका खर्चा वो खुद वहन करेगी.
वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पुरातत्विक सर्वेक्षण के निर्देश दिए.

वाराणसी. काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मामले में कोर्ट ने गुरुवार को पुरातात्विक सर्वेक्षण की मंजूरी दे दी है. कोर्ट ने आर्कोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया को खुदाई करने का निर्देश दिया है. जिसको खर्चा वो खुद उठाएगी. 1991 से चल रहे इस मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट के जज आशुतोष तिवारी ने ये फैसला सुनाया है. कोर्ट ने इसके लिए ऑब्जर्वर के नेतृत्व में पांच सदस्यीय कमेटी गठित करने को कहा है. सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने कहा कि हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती देंगे.

मिली जानकारी के मुताबिक, ज्ञानवापी मामले में विजय शंकर रस्तोगी ने कोर्ट में पुरातात्विक सर्वेक्षण करने की अर्जी दी थी. सिविल जज आशुतोष तिवारी ने इस अर्जी को मंजूरी दे दी है. पिछली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जज ने इस फैसले को 8 अप्रैल के लिए सुरक्षित रख लिया था. 

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आपको बता दें कि विजय शंकर रस्तोगी कोर्ट में दलील दी कि विवादित स्थल की धार्मिक स्थिति 15 अगस्त 1947 को मंदिर की थी या मस्जिद की, इसके लिए सबूत की जरूरत है. विवादित स्थल विश्वनाथ मंदिर का एक अंश है इसलिए एक अंश की धार्मिक स्थिति का निर्धारण नहीं किया जा सकता बल्कि ज्ञानवापी परिसर का भौतिक साक्ष्य लिया जाना जरूरी है. जिसे पुरातात्विक विभाग जांचकर वस्तुस्थिति स्पष्ट कर सकता है.

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कोर्ट के इस फैसले पर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील अभय नाथ यादव ने कहा कि वो फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और इसे हाईकोर्ट में चुनौती देंगे. इस मामले में सुनवाई के क्षेत्राधिकारी को लेकर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अंजुमत इंतजामिया मस्जिद ने सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक के कोर्ट में सुनवाई करने के लिए अदालत में क्षेत्राधिकार को चुनौती दी थी.

 

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