मंडुवाडीह को बनारस रेलवे स्टेशन की नहीं मिली पहचान, नाम परिवर्तन का फरमान अधूरा

Smart News Team, Last updated: Fri, 15th Jan 2021, 5:28 PM IST
  • केंद्र सरकार की ओर से शासकीय फरमान जारी होने के बाद भी अब तक काशी के मंडुआडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदल कर बनारस रेलवे स्टेशन नहीं किया जा सका है. देश में धार्मिक सांस्कृतिक पौराणिक पहचान रखने वाला वाराणसी रेलवे स्टेशन की पहचान बनाने को तरस रहा है.
मंडुआडीह रेलवे स्टेशन (फाइल फोटो)

वाराणसी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा को भांपते हुए केंद्र सरकार ने गत 13 सितंबर 2020 को काशी के मंडुआडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर बनारस रेलवे स्टेशन करने की घोषणा की थी. मंडुआडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलने को लेकर समय-समय पर मांग उठाई जाती रही है. जन भावनाओं को देखते हुए साल 2014-15 में तत्कालीन केंद्रीय रेल राज्यमंत्री मनोज कुमार सिन्हा ने रोहनिया स्थित ऐढे गांव में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए मंडुवाडीह स्टेशन का नाम बदलने का वादा किया था.

अपने वादे को पूरा करने के लिए तत्कालीन रेल राज्य मंत्री श्री सिन्हा ने इस दिशा में मंत्रालय की स्वीकृति प्रदान करने के बाद राज्य व केंद्र सरकार को स्वीकृति के लिए प्रस्ताव आगे बढ़ाया था. इसके अलावा काशी के कैश बनारसी फाउंडेशन और जनजागृति समिति ने भी नाम बदलने को लेकर अपनी मांग रखी थी. इसको लेकर उनकी दलील थी कि मंडुआडीह रेलवे स्टेशन के कारण देश व विदेश से आने वाले पर्यटक भ्रमित होते हैं. सैलानियों को नाम को लेकर भ्रम की स्थिति के कारण परेशान होना पड़ता है.

वाराणसी में मामूली बात पर विधवा की बेरहमी से पिटाई, केस दर्ज

इन्हीं सब दलीलों को मद्देनजर रखते हुए केंद्र सरकार ने गत 13 सितंबर 2020 को मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर वाराणसी रेलवे स्टेशन नाम रखने का फरमान जारी किया था. लेकिन केंद्र सरकार के आदेश के बावजूद अब तक मंडुआडीह रेलवे स्टेशन का नाम वाराणसी रेलवे स्टेशन नहीं रखा जा सका है. नाम ना बदले जाने को लेकर स्थानीय लोगों में भी मायूसी है.

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें