काशी और काशी के लोगों से बेहद लगाव रखते थे नेताजी सुभाष चंद्र बोस

Smart News Team, Last updated: Sat, 23rd Jan 2021, 2:51 PM IST
  • भारत की आजादी में अहम योगदान निभाने वाले पराक्रमी नेताजी सुभाष चंद्र बोस का काशी और काशी के लोगों से जीवन भर लगाव रहा. जेल में बंदी रहे हो या फिर विदेश में काशी के मित्रों को उन्होंने कभी नहीं भूले. अपने मित्रों को पत्र लिखकर उनकी कुशल क्षेम के साथ ही राष्ट्रवाद जैसे विषय पर सवाल जवाब किया करते थे.
नेताजी सुभाष चंद्र बोस

वाराणसी: परम स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस अपने जीवन काल में जहां भी रहे हो बनारस से उनका नाता हमेशा जुड़ा रहा. नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन पर आधारित सुभाष बांगमय ग्रंथ के एक प्रसंग में वर्णित है कि नेताजी बर्मा यानी आज के दौर का म्यामार देश देश के मांडले कारागार में 3 साल की सजा काट रहे थे. उस दौरान भी नेता जी ने काशी और काशी के मित्रों को नहीं भुलाया.

जेल से ही नेता जी ने अपने काशी के मित्र और सहपाठी शिवनाथ चटर्जी को पत्र लिखा. उस पत्र के माध्यम से नेता जी ने अपनी आत्मीयता जिज्ञासा अध्ययन शीलता और देश की स्थितियों के प्रति उनकी चिंता सहित उनके विराट व्यक्तित्व के कई पहलुओं पर प्रकाश डाला. 

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बांग्ला भाषा में लिखे गए इस ऐतिहासिक पत्र को नेता जी ने मांडले जेल से 4 जून 1926 को काशी के हरिश्चंद्र घाट रोड पर रहने वाले शिवना चटर्जी को लिखा था. इस पत्र में नेता जी ने अपने मित्र से कुछ पुस्तकें मंगवाई थी. जिसे शिवना चटर्जी ने प्रबंध कर मांडले जेल में उन तक पहुंचाई थी.

 

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