25 साल पहले UP से गुम बुजुर्ग राजस्थान में मिले, सोशल मीडिया की मदद से घर पहुंचे

Smart News Team, Last updated: 06/12/2020 05:54 PM IST
यूपी के फूलपुर गांव के 80 साल के बाबा अपने परिवार से 25 साल पहले बिछड़ गए थे और भटकते हुए राजस्थान जा पहुंचे. वहां दो दिन दो दिन पहले वह अस्पताल में भर्ती हो गए. जिसके बाद राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के एमजी अस्पताल के एक कर्मी ने सोशल मीडिया की मदद लेकर उन्हें परिवार से मिलवा दिया. 
फूलपुर से खोए बुजुर्ग को उनका परिवार 25 वर्ष बाद मिला.

वाराणसी: फूलपुर से 25 साल पहले गुम हुए बाबा अपने घर सही सलामत पहुंच गए हैं और इसमें सोशल मीडिया ने अहम भूमिका निभाई है. बाबा की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी जिसके कारण वह अपने घर नहीं लौट पाए थे लेकिन राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के एमजी अस्पताल के कर्मी ने उन्हें सोशल मीडिया की मदद से घर पहुंचा दिया है. फरिश्ता बनकर आए स्टाफ कर्मी से बुजुर्ग ने अपनी आपबीती बताई और उसे सुनने के बाद उसने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर कर दिया. बुजुर्ग का अपने परिवार से 25 वर्ष बाद मिलना हुआ. बुजुर्ग प्रयागराज जिले के फूलपुर शहर में रहने वाले हैं.

80 वर्षीय बृजेश रमण श्रीवास्तव 25 वर्ष पूर्व राजस्थान पहुंच गए थे. इसी क्रम में वह दो दिन पहले ही राजस्थान के भीलवाड़ा शहर जा पहुंचे. जहां, वे खुद पैर में इंफेक्शन होने के कारण एमजी अस्पताल में अज्ञात के रुप पर भर्ती हुए थे. इस दौरान वहां के स्टाफ कर्मी घनश्याम शर्मा की उनपर नज़र पड़ी और वह उनके पास गया. 

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इसके बाद तो मानों जैसे ईश्वर किसी इंसान से रुबरू हुआ हो. बुजुर्ग ने घनश्याम को अपना पता बताया. जिसके बाद घनश्याम ने सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीर और पता शेयर कर दिया. जो कुछ देर में ही वायरल हो गया और यह बात फूलपुर थाने में तैनात दरोगा अरुण सिंह को पता चली.

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बिना देर किए दरोगा बुजुर्ग का पता ढूढ़ते हुए घर बढ़ौना पहुंच गया. इसके बाद दरोगा ने परिजन से बताया और उनसे बुजुर्ग की बात कराई. इसके बाद उनके भाई योगेश रमण, बृजेश के पुत्र मनोज और भतीजा धीरज किराए की कार लेकर राजस्थान के महात्मा गांधी अस्पताल पहुंचे. जहां से बुजुर्ग को घर ले आएं.  

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बुजुर्ग के परिवार ने उनका जोरदार स्वागत किया. इसके साथ ही परिवार के लोगों ने एमजी अस्पताल के कर्मचारी घनश्याम शर्मा और क्षेत्रीय दरोगा अरुण सिंह का आभार जताया. परिवार ने बताया कि उनके तीन पुत्र संजय, मनोद और धीरज हैं. उनकी मानें तो पिता 25 वर्ष पूर्व मानसिक हालत ठीक ना होने के कारण वो राजस्थान जा पहुंचे. जहां वह किसी तरह अपनी जीवन व्यतीत कर रहे थे.

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