PM मोदी को भाया संस्कृत में क्रिकेट कमेंट्री, कहा- और क्षेत्रीय भाषाओं में भी हो

Smart News Team, Last updated: Sun, 28th Feb 2021, 4:24 PM IST
  • पिछले दिनों वाराणसी में हुए बटुकों के क्रिकेट और संस्‍कृत में कमेंट्री का जिक्र कर संस्‍कृत की महत्ता के बारे में बताया. पीएम मोदी ने खेल मंत्रालय से क्षेत्रीय भाषाओं और संस्कृति को प्रोत्साहित करने की भी अपील की. 
PM मोदी को भाया संस्कृत में क्रिकेट कमेंट्री, कहा- और क्षेत्रीय भाषाओं में भी हो (फाइल फ़ोटो)

वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार की सुबह मन की बात में उन्होंने पिछले दिनों वाराणसी में हुए बटुकों के क्रिकेट और संस्‍कृत में कमेंट्री का जिक्र कर संस्‍कृत की महत्ता के बारे में बताया. पीएम मोदी ने खेल मंत्रालय से क्षेत्रीय भाषाओं और संस्कृति को प्रोत्साहित करने की भी अपील की. पीएम मोदी ने कहा, 'हमें भारतीय खेलों में क्षेत्रीय भाषाओं में कमेंट्री को बढ़ावा देना चाहिए. मैं स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री और निजी संस्थानों से इस बारे में विचार करने की अपील करता हूं.

पीएम मोदी ने वाराणसी में हुइ क्रिकेट प्रतियोगिता के बारे में बड़े विस्तार से बात की और कहा कि दरअसल यह संस्कृत में की जा रही क्रिकेट कमेंट्री है. वाराणसी में, संस्कृत महाविद्यालयों के बीच एक क्रिकेट प्रतियोगिता होती है. इस बार भी शास्त्रार्थ महाविद्यालय, स्वामी वेदांती वेद विद्यापीठ, श्री ब्रह्म वेद विद्यालय और इंटरनेशनल चंद्रमौली चैरिटेबल ट्रस्ट के बीच क्रिकेट प्रतियोगिता हुई. इस प्रतियोगिता के मैचों के दौरान कमेंट्री संस्कृत भाषा में की जाती है. मैंने उस कमेंट्री का एक बहुत छोटा-सा हिस्सा आपको सुनाया. यही नहीं, इस प्रतियोगिता में खिलाड़ी और कमेंटेटर पारंपरिक परिधान में नजर आते हैं. यदि आपको एनर्जी, एक्साइटमेंट, सस्पेंस सब कुछ एक साथ चाहिए तो आपको खेलों और प्रतियोगिताओं की कमेंट्री सुननी चाहिए.

योगी सरकार का बड़ा फैसला, बैंक खाते को आधार से कराएं लिंक तभी मिलेगी स्कॉलरशिप

जिन खेलों की कमेंट्री समृद्ध, उनका प्रचार-प्रसार तेजी से हुआ. पीएम मोदी ने कहा कि हमने देखा है कि जिन खेलों में कमेंट्री समृद्ध है, उनका प्रचार-प्रसार बहुत तेजी से होता है. हमारे यहां भी बहुत से भारतीय खेल हैं लेकिन उनमें लाइव कमेंट्री कल्चर नहीं आया है. और इस वजह से वो लुप्त होने की स्थिति में हैं. पीएम मोदी ने कहा मेरे मन में एक विचार है, जिससे खेलों अलग-अलग खेल और विशेषकर भारतीय खेलों की अच्छी कमेंट्री अधिक से अधिक क्षेत्रीय भाषाओं में हो. हमें इसे प्रोत्साहित करने के बारे में जरूर सोचना चाहिए. खेल मंत्रालय और प्राइवेट संस्थान के सहयोगियों से इस बारे में सोचने का आग्रह करूंगा.

 

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें