प्राइवेट एजेंसी को सौंपा ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का काम, चक्कर काट रहे लोग

Smart News Team, Last updated: 17/01/2021 05:03 PM IST
  • परिवहन विभाग में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने और पहुंचाने का ठेका निजी एजेंसी की ओर से एक सप्ताह में ड्राइविंग लाइसेंस देने का समय निर्धारित होने के बाद भी उन्हें नहीं मिल रहा है. ड्राइविंग लाइसेंस मिलने में एक-दो सप्ताह नहीं, एक- दो महीने लग जा रहे हैं, कई लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस तो आता भी नहीं है. 
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वाराणसी: ड्राइविंग लाइसेंस के काम में तेजी लाने और अभ्यर्थियों के लिए सुगम बनाने लिए वाराणसी में ड्राइविंग लाइसेंस का निजी एजेंसी के हाथ में सौंप गया था. लेकीन ये व्यवस्था अब अभ्यर्थियों पर उलट भरी पड़ रहा है. परिवहन विभाग में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने और पहुंचाने का ठेका निजी एजेंसी की ओर से एक सप्ताह में ड्राइविंग लाइसेंस देने का समय निर्धारित होने के बाद भी उन्हें नहीं मिल रहा है. उन्हें ड्राइविंग लाइसेंस मिलने में एक-दो सप्ताह नहीं, एक- दो महीने लग जा रहे हैं, कई लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस तो आता भी नहीं है. परेशान अभ्यर्थी परिवहन विभाग कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं. लेकिन उन्हें वहां कोई जिम्मेदार यह बताने को तैयार नहीं है कि डीएल कब मिलेगा. प्राइवेट एजेंसी कर्मी डाक विभाग में पता लगाने की नसीहत देकर अपना पीछा छुड़ा ले रहे हैं.

ड्राइविंग लाइसेंस के काम में नए प्रयोग और तेजी लाने और कार्यलय में भीड़ को काम करने के लिए शासन ने ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का ठेका नोएडा के एक निजी कंपनी को दिया है. अभ्यार्थियों को इसका फायदा मिलने के बजाए उनकी मुसीबत और बढ़ गई है. ड्राइविंग परीक्षा में पास अभ्यर्थियों के ड्राइविंग लायसेंस उनके घर नहीं पहुंच रहे हैं. 


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परेशान अभ्यर्थी परिवहन विभाग कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उनकी समस्या खत्म जस की तस बनी हुई है. यह समस्या एक-दो अभ्यर्थियों की नहीं है, बल्कि अधिकतर के साथ यह समस्या है. यही नहीं, एक माह तक डीएल घर नहीं पहुंचने की दशा में कई अभ्यर्थियों ने तो डुप्लीकेट ड्राइविंग लायसेंस बनवा लिए.

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डुप्लीकेट बनवाने पर 15 से 20 दिन बाद डीएल आ जायेगा. लेकिन इसका बोझ अभ्यर्थियों अभ्यार्थियों के पॉकेट पर पड़ रहा है. कई के तो डुप्लीकेट भी समय से नहीं मिल पा रहे हैं. इस बारे में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) सर्वेश चतुर्वेदी का कहना है कि अभ्यर्थियों द्वारा सही नाम और पता नहीं देने से ज्यादा दिक्कत आती है. इसीलिए रजिस्ट्री के लिफाफे पर उन्हीं से नाम, पता और मोबाइल नंबर लिखवाया जाता है जिससे कोई कंफ्यूजन नहीं रहे.

 

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