पीएम नरेंद्र मोदी की काशी को स्मार्ट सिटी बनाने का प्रस्ताव तैयार

Smart News Team, Last updated: Wed, 20th Jan 2021, 7:40 PM IST
  • काशी काफी तेजी से स्मार्ट सिटी में बदल रहा है. शहर में घाट, सड़कें, पार्क, चौराहे, मंदिर के आसपास के क्षेत्र को सुंदर बनाने का काम शुरू हो चुका है. काशी विश्वनाथ मंदिर को कॉरीडोर बना के भव्य बनाया जा रहा है ताकि यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी हो.
25 जनवरी को प्रजेंटेशन कमिश्नर और आला अधिकारियों की बैठक होगी.

वाराणसी-  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शहर काशी काफी तेजी से स्मार्ट सिटी में बदल रहा है. शहर में घाट, सड़कें, पार्क, चौराहे, मंदिर के आसपास के क्षेत्र को सुंदर बनाने का काम शुरू हो चुका है.काशी के हृदय स्थल गोदौलिया-दशाश्वमेध की तो सूरत ही बदल दी गई है. काशी विश्वनाथ मंदिर को कॉरीडोर बना के भव्य बनाया जा रह है ताकि यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी हो.

लॉकडाउन के बाद से काशी में उम्मीद से ज़्यादा पर्यटक पहुंचे हैं. यहां पर आने वाले पर्यटकों को रास्ते में मिलने वाले भिखारियों की वजह से काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. इन्हीं परेशानियों को दूर करने के लिए बेघरों और अनाथों के लिए काम करने वाली संस्था 'अपना घर आश्रम' ने इसके लिए एक प्रस्ताव तैयार किया है. इस प्रस्ताव का प्रजेंटेशन कमिश्नर और आला अधिकारियों की मौजूदगी में 25 जनवरी को होने जा रहा है. इस बैठक में कमिश्नर ने 18 विभागों के अधिकारियों के साथ प्रोबेशन अधिकारी भी शामिल होंगे. बैठक में भिखारियों के रहने, खाने और पुनर्वास कि व्यवस्था की जाएगी.

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इन्हीं परेशानियों को दूर करने का अब रास्ता निकाला जा रहा है. बेघरों और अनाथों के लिए काम करने वाली वाराणसी की संस्था 'अपना घर आश्रम' ने इसके लिए एक प्रस्ताव तैयार किया है. इस प्रस्ताव का प्रजेंटेशन कमिश्नर और आला अधिकारियों की मौजूदगी में 25 जनवरी को होने जा रहा है. इस बैठक के लिए कमिश्नर ने 18 विभागों के अधिकारियों को बुलाया है. पुलिस, प्रशासन के साथ ही प्रोबेशन अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहेंगे. सबकुछ ठीक रहा तो भिखारियों को अपना घर आश्रय स्थल पर शिफ्ट किया जाएगा. वहां इनके रहने, खाने और पुनर्वास की व्यवस्था होगी. कुछ सरकारी आश्रयस्थल भी इसके लिए चिह्नित हो सकते हैं.

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'अपना घर आश्रम' के संचालक डाक्टर निरंजन कहते हैं की भीख मांगने वाले ज़्यादातर लोग आलसी होते हैं, यह लोग काम करना नहीं चाहते. अक्सर यह देखा जाता है कि भिखारियों के ग्रुप को हेड भी होता है जो इन्हे शरण दे कर इसे पैसे वसूलता है. कई बार तो किसी विशेष अवसर पर इन भिखारियों को बड़ी तादाद में गाड़ियों में भरकर मंदिरो तक पहुंचाया जाता है. रहने का ठिकाना ना होना इन भिखारियों के भीख मांगने का बड़ा कारण है. सुप्रीम कोर्ट भी भीक्षाटन को अवैध एवं दंडनीय अपराध बता चुका है. इसके बाद भी भिक्षाटन पर रोक नहीं लग पा रही है.

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