बनारस के प्रख्यात शायर मेयार सनेही का 82 वर्ष की उम्र में निधन

Smart News Team, Last updated: Fri, 15th Jan 2021, 8:08 PM IST
  • पिछले कुछ दिनों से बीमार थे. हरहुआ में अपनी बेटी के घर पर रहते थे. आज भी शायरों की दुनिया में उनका खास मकाम था.
बनारस के प्रख्यात शायर मेयार सनेही का 82 वर्ष की उम्र में निधन (फोटो सभार-सोशल मीडिया)

वाराणसी: बनारस के प्रख्यात शायर मेयार सनेही का 82 वर्ष की उम्र में निधन. पिछले कुछ दिनों से बीमार थे. हरहुआ में अपनी बेटी के घर पर रहते थे. आज भी शायरों की दुनिया में उनका खास मकाम था. शनिवार को दोपहर 1:30 बजे उन्हें सुपुर्द ए खाक किया जाएगा. पिछले कुछ दिनों से बीमार थे. हरहुआ में अपनी बेटी के घर पर रहते थे. आज भी शायरों की  दुनिया में उनका खास मकाम था. कल दोपहर 1:30 बजे उन्हें सुपुर्द ए खाक किया जाएगा.

शायर जनाब "मेयार सनेही " साहब ने अपनी ऊपर दी गयी ग़ज़ल के शेर में किया है. मेयार सनेही साहब 7 मार्च 1936 को बाराबंकी (उ प्र ) में पैदा हुए. साहित्यरत्न तक शिक्षा प्राप्त करने बाद उन्होंने ग़ज़ल लेखन का एक अटूट सिलसिला कायम किया.

कारवाँ से आँधियों की छेड़ भी क्या खूब थी

होश वाले उड़ गए ओ' बावले चलते रहे

गुलशनो-सहरा हमारी राह में आये मगर

हम किसी की याद में खोये हुए चलते रहे

ऐ 'सनेही' जौहरी को मान कर अपना खुदा

खोटे सिक्के भी बड़े आराम से चलते रहे

BHU में BNYAS के छात्र इंटर्नशिप और भत्ते को लेकर धरने पर बैठे, भेदभाव का आरोप

सनेही साहब की ग़ज़लें रवायती ढाँचे में ढली होने के बावजूद अपने अनोखे अंदाज़ के कारण भीड़ से अलग दिखाई देती हैं। अपने समय और समाज को बेहद सादगी और साफगोई के साथ चित्रित करना सनेही साहब की खासियत है।हिंदी उर्दू के लफ़्ज़ों में वो बहुत ख़ूबसूरती से अपनी ग़ज़लों में ढालते हैं

ऋतुराज के ख्याल में गुम होके वनपरी

कब से बिछाए बैठी है मखमल पलाश का

सूरज को भी चराग दिखाने लगा है अब

बढ़ता ही जा रहा है मनोबल पलाश का

है ज़िन्दगी का रंग या मौसम का ये लहू

या फिर किसी ने दिल किया घायल पलाश का

'मेयार' इन्कलाब का परचम लिए हुए

उतरा है आसमान से ये दल पलाश का

मंडुवाडीह को बनारस रेलवे स्टेशन की नहीं मिली पहचान, नाम परिवर्तन का फरमान अधूरा

पलाश पर इस से खूबसूरत कलाम मैंने तो आजतक नहीं पढ़ा कमाल के बिम्ब प्रस्तुत किये हैं मेयार साहब ने।इस किताब के फ्लैप पर छपे श्री विनय मिश्र जी के कथनानुसार "ग़ज़ल का रिवायती तगज्जुल बरकरार रखते हुए निजी और घर संसार के संवेदनों को अनुभव की सुई में पिरो कर शायरी का सुन्दर हार बना देना कमाल का फन तो है ही, मेयार सनेही की शायराना तबियत का पुख्ता प्रमाण भी है."

माहौल में अनबन का चलन देख रहे हैं

बिखरे हुए सदभाव-सुमन देख रहे हैं

जिस डाल पे' बैठे हैं उसे काटने वाले

आराम से अपना ही पतन देख रहे हैं

वो लोग जो नफरत के सिवा कुछ नहीं देते

उनको भी मुहब्बत से अपन देख रहे हैं

सनेही साहब अपनी ग़ज़लों में इस तरह के चमत्कार अक्सर करते दिखाई देते हैं ये ही कारण है की इनकी ग़ज़लें बार बार पढने को जी करता है। विगत पचास वर्षों से ग़ज़लों की अविरल धारा बहाने वाले इस विलक्षण शायर की जितनी तारीफ़ की जाय कम है, मूल रूप से उर्दू के शायर सनेही साहब की ग़ज़लों में हिंदी के लफ़्ज़ों का प्रयोग अद्भुत है।

हलाहल बांटने वालो, इसे तो पी चुका हूँ मैं

मुझे वो चीज़ दी जाय जिसे पीना असंभव हो

बताओ क्या इसी को हार्दिक अनुबंध कहते हैं

इधर आंसू पियें जाएँ उधर मस्ती का अनुभव हो

'सनेही' ज़िन्दगी के ज़हर को रख दो ठिकाने से

कि मुमकिन है इसी से एक दिन अमृत का उदभव हो

 

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