स्टाम्प रेट वृद्धि से राजस्व में आई कमी, राज्यमंत्री ने दिए वसूली के आदेश

Smart News Team, Last updated: 21/11/2020 03:23 PM IST
  • स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने स्टाम्प ड्यूटी से कम राजस्व आने पर पदाधिकारियों की क्लास लगाई.
स्टांम्प एंड रजिस्ट्रेशन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जयसवाल.(फाइल फोटो)

वाराणसी. स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल ने जिले के कमिश्नरी सभागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए प्रदेश एआईजी, डीआईजी व अन्य अधिकारियों के साथ विभागीय कार्यों की समीक्षा करते हुए. अधिकारियों को राजस्व कि अधिक से अधिक वसूली करने के निर्देश दिए.

मंत्री ने कहा जिन जिलों में स्टाम्प की कमी है, उसे अविलंब पूरा किया जाए. कम राजस्व की वसूली वाले जिलों में शामिल गौतमुद्धनगर, गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद के सब रजिस्टरों को चेतावनी दी.प्रत्येक जिलों के डीएम को महीने में पांच ओर एडीएम को (वित्त एवं राजस्व) को 25 स्थलीय निरीक्षण का आदेश है. इसके बावजूद संबंधित अधिकारी अधीनस्थ कर्मचारियों को भेज देते हैं. इससे कार्य प्रभावित होता है. 

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बता दें कि स्टाम्प ड्यूटी से कम राजस्व का एक ये भी कारण है कि साल के शुरुआत में स्टाम्प ड्यूटी का रेट में ढाई से दस गुना वृद्धि हुए है, जिसके कारण स्टाम्प क्रेता थोड़ी परहेज़ कर रहे है. सरकार ने स्टाम्प ड्यूटी के मूल्य वृद्धि से सालाना 400 से 500 करोड़ के आमदनी का लक्ष्य रखा जिसे पूरा करने के लिए हर कोई जुगत में लगा है.

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कई राज्य इन 20 वर्षों में कई-कई बार विभिन्न तरह के विलेखों पर स्टांप शुल्क में बदलाव कर चुके हैं. यहां लंबे समय से स्टांप शुल्क की समीक्षा न होने से कई विलेखों पर लिए जा रहे स्टांप शुल्क अनौचित्यपूर्ण व खर्च उससे अधिक हो गए थे.मसलन, 10 रुपये के सामान्य स्टांप पत्र पर 27 रुपये का खर्च आता है. स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग ने गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक व राजस्थान के स्टांप एक्ट व बेस्ट प्रैक्टिसेज का अध्ययन कर प्रदेश के स्टांप एक्ट में बदलाव किया है.

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अधिकारी ने बताया कि मौजूदा दरों को तर्कसंगत बनाने के साथ बौद्धिक संपदा संबंधी अधिकारों के अंतरण, संचार माध्यमों में टीवी, रेडियो, सिनेमा व केबल नेटवर्क या अन्य मीडिया साधनों में विज्ञापन संबंधी अनुबंधों व टोल प्लाजा के अनुबंध पर स्टांप देयता तय करने का  था. पहले इन पर किसी तरह की स्टांप शुल्क की व्यवस्था थी. तो कहीं ना कहीं स्टाम्प ड्यूटी की दरों में हुए बढ़ोत्तरी के वजह से स्टाम्प की बिक्री प्रभावित हुए है.

 

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