वाराणसी : बनारस रंग महोत्सव में तिब्बत आजादी की दिखी छटपटाहट

Smart News Team, Last updated: Mon, 1st Feb 2021, 9:19 PM IST
  • शाकुंतलम भवन में चल रहे बनारस रंग महोत्सव में जहां कलाकारों ने बेहतरीन अभिनय कौशल का प्रदर्शन किया वहीं कलाकारों की अभिनय क्षमता और नाटक के दृश्य और विषय भावनाओं की अनुभूति का दर्शकों ने भी खूब आनंद उठाया.
फाइल फोटो

वाराणसी. काशी के नागरी नाटक मंडली के शाकुंतलम भवन में चल रहे बनारस रंग महोत्सव के समापन मौके पर साहित्यकार डॉ. नीरजा माधव के उपन्यास गेशे जंपा पर आधारित नाटक का मंचन किया गया. इसमें देश में रहने वाले तिब्बती शरणार्थियों की आजादी को लेकर छटपटाहट का मार्मिक दृश्य प्रस्तुत किया गया.

गेशे चंपा नाटक के मंचन में रंग संस्था कामायनी के कलाकारों ने शानदार अभिनय का प्रदर्शन किया. नाटक में मुख्य पात्र गेशे जंपा को नायक के तौर पर तिब्बत देश का नागरिक दर्शाया गया तो नायिका देवयानी भारत देश की निवासी की तौर पर प्रस्तुत की गई. तिब्बतियों की स्वतंत्र सांस्कृतिक और धार्मिक अस्मिता के प्रश्न पर छाई वैश्विक चुप्पी तोड़ने की दिशा में नीरजा माधव का यह अनूठा उपन्यास को तिब्बती अनुभूति और उनकी लोक संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति माना गया है. नाटक में गेशे चंपा की भूमिका उमेश भाटिया ने तथा देवयानी की भूमिका में विशाखा आहूजा ने शानदार अभिनय कला का प्रदर्शन किया.

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इसके अलावा नाटक के सफल प्रदर्शन में नीलम सिंह, अरविंद राय, नीलम पाल, अमर अग्रवाल, नवीन चंद्र, आयुष सिंह, विशाल तिवारी, कंचन शर्मा, अनुराधा गुप्ता, साहेब कुमार, सौरभ, राहुल, कुमार रजक, अवनीश कुमार, ऋषभ जायसवाल, अनंत श्रीवास्तव, अमित अग्रवाल आदि कलाकारों ने बेहतरीन अभिनय कौशल का प्रदर्शन किया. बनारस रंग महोत्सव के समापन मौके पर आयोजित इस नाटक के मुख्य अतिथि कुलपति प्रोफेसर कल्प लता पांडे और विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रीता जायसवाल ने कलाकारों की अभिनय क्षमता और नाटक के दृश्य और विषय भावनाओं की अनुभूति का लुत्फ उठाया.

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