यूपी चुनाव : जनता के साथ भगवान को खुश करने में जुटे प्रत्याशी, घरों-मंदिरों में करा रहे विजय अनुष्‍ठान

Uttam Kumar, Last updated: Wed, 19th Jan 2022, 10:45 AM IST
  • यूपी चुनाव को लेकर इन दिनों काशी में पूजा अर्चना काफी कराया जा रहा है. कई प्रत्याशी टिकट को लेकर तो कई यूपी चुनाव में जीत के लिए विजय अनुष्‍ठान करवा रहे हैं. इस समय काशी के अलग- अलग मंदिरों में 18 से अधिक अनुष्ठान चल रहे हैं. 
यूपी चुनाव को लेकर इन दिनों काशी में काफी पूजा अर्चना कराया जा रहा है. फाइल फोटो

वाराणसी:  यूपी चुनाव में अब महीने भर से भी कम समय बचा है. सभी पार्टी ने कुछ सीटों पर उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है. वहीं बाकी बचे सीटों पर उम्मीदवारों के नाम की घोषणा जल्द हो जाएगी. चुनाव में जीत के लिए इन दिनों प्रत्याशी अपने प्रचार के साथ पूजा अर्चना पर भी काफी ध्यान दे रहे हैं. जानकारी के मुताबिक इस समय काशी के विभिन्न स्थानों पर 18 से अधिक अनुष्ठान चल रहे हैं. इन सभी के यजमान प्रमुख दलों के घोषित या संभावित प्रत्याशी हैं. वहीं मकर संक्रांति के मौके पर भी आधा दर्जन से अधिक नेताओं ने संकल्प कराया था. 

काशी के एक प्रसिद्ध ज्योतिषी के अनुसार माघ की गुप्त नवरात्रि में कई गुना अधिक अनुष्ठान होंगे क्योंकि यह नवरात्रि गोपनीय और कामनापरक पूजा-अनुष्ठान के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है. ज्योतिषी के अनुसार माघ नवरात्रि इस बार दो फरवरी से शुरू हो रही है और 10 फरवरी को पूर्णाहुति दी जाएगी. उसी तिथि को पहले चरण का मतदान होना है. इसलिए बहुत सारे नेता विजय अनुष्ठान के लिए माघी नवरात्र को तरजीह दे रहे हैं. 

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प्राप्त जानकारी के अनुसार कानपुर और आसपास से टिकट की आस में जुटे प्रत्याशी पिछले 15 दिनों में उज्जैन, दतिया, ओरछा और मैहर के कई चक्कर लगा चुके हैं. सत्ताधारी दल यानि बीजेपी से टिकट पाने के लिए सात दावेदारों ने पहली जनवरी से 15 जनवरी के बीच कम से कम 4 बार महाकाल के दर्शन कर चुके हैं. उनमें से तीन  तो टिकट के लिए अनुष्ठान भी करा चुके हैं.

पंडितों के अनुसार चुनाव के लिए अनुष्ठान का पैकेज 55 हजार से शुरू होकर दो लाख रुपये तक जाता है. इसमें पूजन और हवन सामग्रियों का खर्च शामिल नहीं है. उसे जोड़ लिया जाए तो चुनाव के लिए एक अनुष्ठान का खर्च 65 हजार से शुरू होकर सवा दो या ढाई लाख रुपये तक पड़ता है. इसमें सबसे बड़ा खर्च मंत्र जप करने वाले कर्मकांडी ब्राह्मणों का है जो उनकी संख्या के आधार पर तय होता है. जप के लिए तीन, छह, नौ व 11 कर्मकांडी तक रखे जाते हैं. 

 

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