वाराणसी: 20 साल से खुद को जिंदा साबित करने में लगा ये शख्स, सरकारी कागजों में है मृत

Somya Sri, Last updated: Sun, 20th Feb 2022, 8:14 AM IST
  • वाराणसी के छितौनी, चौबेपुर गांव के रहने वाले संतोष सिंह को करीब 20 साल पहले पाटीदारों ने सरकारी कागजों में उसे मृत घोषित कर उसकी जमीन हड़प ली थी. तब से मूरत खुद को जिंदा साबित करने में लगे हुए हैं. इस बार के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नामांकन पत्र दाखिल किया पर वो भी खारिज हो गया.
संतोष कुमार मूरत (फोटो साभार- हिंदुस्तान अखबार)

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जहां एक शख्स करीब 20 सालों से सरकारी कागजों में मृत घोषित है. वह 20 सालों से कोशिश में लगा है कि किसी तरीके से उसे जीवित घोषित कर दिया जाए. लेकिन इतने साल बीत जाने के बाद भी वह अब तक कामयाब नहीं हो सका है. करीब 20 साल पहले पाटीदारों ने सरकारी कागजों में उसे मृत घोषित कर उसकी जमीन हड़प ली थी. तब से मूरत खुद को जिंदा साबित करने में लगे हुए हैं.

छितौनी (चौबेपुर) गांव के रहने वाले संतोष सिंह मूरत 'मै जिंदा हूं' के नाम से जिले में चर्चित है. मूरत के मुताबिक पट्टीदारों ने 20 साल पहले उन्हें मृत दर्शाकर जमीन हड़प ली. अब वह खुद को जीवित साबित करने के लिए सरकारी सिस्टम से जूझ रहे हैं. इसके लिए मूरत ने थाने में मुकदमा दर्ज करवाने से लेकर कई चुनाव में मैदान में उतरने का पैंतरा अपना चुके हैं लेकिन हर जगह वे नाकाम रहे. वहीं इस बार यूपी विधानसभा चुनाव में भी संतोष ने खुद को जीवित दर्शाने के लिए शिवपुर विस क्षेत्र से नामांकन किया, लेकिन उनका पर्चा खारिज हो गया.

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जानकारी के मुताबिक मूरत ने हर विधानसभा चुनाव में निर्दल मैदान में उतरने की जुगत लगाते रहे, तब भी किसी न किसी कारण से पर्चा खारिज होता रहा है. इसके पहले वाले विधानसभा चुनाव में भी उनका पर्चा खारिज हो गया था. इसलिए मूरत ने इस बार किसी छोटी पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ने का फैसला किया. लेकिन इस बार भी उनका नामांकन खारिज कर दिया गया. संतोष ने बताया कि जनसंघ पार्टी के टिकट पर उन्होंने नामांकन किया था. पर्चे की जांच में उनका नामांकन खारिज कर दिया गया.

ऐसे हुए मृत घोषित

मूरत ने बताया कि फौजी पिता का निधन 1988 में हो गया. तब वह नाबालिग थे. उनके नाम से वरासत हो गई. साल 2000 तक सब ठीक रहा. इसी साल फिल्म आंच की शूटिंग क्षेत्र में हो रही थी. वह अभिनेता नाना पाटेकर के साथ मुंबई चले गये. वहां से जब दो-तीन साल बाद लौटे तो पता चला कि पट्टीदारों ने सदर तहसील में उन्हें कागजों में मृत घोषित कराकर उनकी जमीन हड़प ली. तब से वह संघर्ष कर रहे हैं.

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