वाराणसी: जर्मन जुगाड़ से खत्म होगा गंगा नदी का हरा शैवाल, डाला गया केमिकल

Smart News Team, Last updated: Mon, 14th Jun 2021, 10:00 AM IST
वाराणसी की गंगा नदी में मौजूद हरा शैवाल को खत्म करने के लिए जर्मनी के एलगी ब्लूम ट्रीटमेंट मेथड से बायो रेमेडीएशन घोल का छिड़काव किया गया. इस घोल के छिड़काव के कुछ ही घंटों बाद पानी में बदलाव भी देखा गया.
रविवार को वाराणसी गंगा के दशाश्वमेध घाट से सौ मीटर इलाके में बायोरेमेडीएशन केमिकल का छिड़काव किया गया. (प्रतीकात्मक फोटो)

वाराणसी : वाराणसी की गंगा नदी के हरा शैवाल को खत्म करके फिर से पहले जैसी गंगा करने का जर्मन तरीका खोजा है. जिसके तहत रविवार की सुबह वाराणसी के दशाश्वमेध घाट नदी के सौ मीटर में बायो रेमेडीएशन केमिकल का दो बार छिड़काव किया गया. इस केमिकल के छिड़काव से कुछ ही घंटों में चमत्कारी तरीके से नदी का पानी हल्का हरा हो गया. दरअसल यह केमिकल पानी और मिट्टी में प्रदूषण करने वाले तत्व को खत्म करने के लिए एंजाइम का घोल होता है. इस तैयार घोल को बायो रेमेडीएशन कहते हैं. जो एक जर्मन प्रणाली है.

इस बायो रेमेडीएशन घोल को नमामि गंगे के विशेषज्ञ अधिकारियों के निर्देश पर वाराणसी की गंगा नदी में छिड़कने को कहा गया. निर्देश के तहत वाराणसी के दशाश्वमेध घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट, चौसटटी घाट, दरभंगा घाट और मानमंदिर घाट के नदी के सामने घंटाघर छिड़काव किया गया. पहले दिन के छिड़काव के समय घाट पर नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एमपी सिंह और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी कलिका सिंह सहित कई अधिकारी मौजूद थे. इस दौरान प्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रीजनल ऑफिस की टीम ने नदी के पानी का सैंपल भी लिया है.

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दरअसल वाराणसी की गंगा नदी का पानी अज्ञात कारणों से हरा होने लगा. जिसकी जांच के लिए 5 सदस्य कमेटी बनाई गई थी. जिसने जांच करने के बाद पाया कि विंध्याचल में पुराने हो चुके एसटीपी से ये हरा शैवाल निकल रहे हैं. जो पानी के बहाव के साथ वाराणसी के घाट पर पहुंच गए थे. जिसने पूरे नदी को ढक लिया.

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