गाजीपुर खुदाई में मिले पौराणिक अवशेषों की बीएचयू पुरातत्व विभाग कर रहा जांच

Smart News Team, Last updated: Thu, 7th Jan 2021, 9:05 PM IST
  • गाजीपुर जिले में 1 सप्ताह पहले प्रारंभिक खोज में मिले तकरीबन 3 हजार साल पुराने पौराणिक अवशेषों की प्राथमिक स्तर पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग की टीम शोध में जुट गई है.
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग की टीम शोध में जुट गई है

वाराणसी. बता दें कि 1 सप्ताह पहले गाजीपुर जनपद के मिर्जापुर गांव में प्रारंभिक खोज के दौरान तकरीबन तीन हजार पुराने महत्वपूर्ण अवशेष मिले थे. इन प्राचीन वैदिक काल के अवशेषों मे सिन्नी वाली देवी प्रतिमा के प्रमाण मिल रहे हैं. प्रारंभिक सूचना पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग नई दिल्ली की सहमति पर फिलहाल बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग की टीम इन अवशेषों पर शोध कर रही है. क्योंकि इस शोध पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग कड़ी निगाही रख रहा है. इस संबंध में बीएचयू के प्रोफेसर डॉ विनय कुमार ने बताया कि गाजीपुर जनपद के मिर्जापुर गांव में मिले करीब 3000 वर्ष पहले के वैदिक काल के मूर्तियों महत्वपूर्ण सामानों पर बहुत ही बारीकी से शोध कार्य चल रहा है.

शोध के बाद ही पूरी रिपोर्ट भारतीय पुरातत्व विभाग को सौंपी जाएगी. उन्होंने बताया कि अब तक शोध से जो परिणाम निकल कर आए हैं उसकी रिपोर्ट मौखिक तौर पर भारतीय पुरातत्व विभाग को दे दी गई है. उन्होंने बताया कि खोज के दौरान प्राप्त हुए अवशेषों में वैदिक काल की सिन्नी वाली देवी प्रतिमा भी मिली है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह विशेष प्राचीन वैदिक काल के करीबन 3000 साल पुराने हैं. वही गाजीपुर में मिले प्राचीन अवशेषों के संबंध में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण नई दिल्ली के पूर्व महानिदेशक एवं अयोध्या पूरा स्थल के खनन करता रहे डॉक्टर बीआर मणि भी आश्चर्यचकित हैं. उन्होंने इन अवशेषों को देखने और उस पर शोध करने के लिए गाजीपुर पहुंचने की इच्छा जताई है.

यहां यह बताना जरूरी है कि सादात नगर के समता पीजी कॉलेज के राज निषाद के रिटायर्ड प्रोफेसर वह मिर्जापुर गांव के रहने वाले डॉ विजय बहादुर सिंह ने बताया कि उनके गांव में भले ही अब पुरातत्व विभाग के नजर पड़ी हो लेकिन उन्होंने वर्ष 1973 में जब वह बीएचयू के रिसर्च स्कॉलर थे तभी उन्होंने अपने गांव के भूगर्भ में छपे पौराणिक सामानों के लिए बीएचयू के पुरातत्व विभाग को पत्र लिखा था. लेकिन उस समय बीएचयू के पुरातत्व विभाग की ओर से उनके पत्र पर ध्यान नहीं दिया गया था. रिटायर्ड प्रोफेसर डॉ विजय बहादुर सिंह ने बताया कि खुद उनके खेत में भी उनके पुरखों को कई मुख वाली काफी बजनी मूर्ति भी मिली थी. जिसे उनके पुरखों ने अपने खेत पर ही स्थापित करा दिया. उन्होंने बताया कि उनकी खेत की जमीन में पत्थरों के सिल लोढ़ा आज भी मौजूद है. रिटायर्ड प्रोफेसर ने बताया कि गांव पर खोज की जाए तो निश्चित तौर पर यहां कई और धरोहर है मिल सकती हैं.

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