तेजी से डिजिटल स्वरूप में लायी जा रहीं 5500 प्राचीन पांडुलिपियां

Smart News Team, Last updated: 30/11/2020 07:42 PM IST
  • इनके अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए इसमें रखे गए कई महान व्यक्तित्वों के से संबंधित मूल दस्तावेज, चिट्ठियों, शोध और अनुसंधानों को संरक्षित करना अब बेहद जरूरी है.
फाइल फोटो

वाराणसी. कोरोना काल से बंद पड़े बीएचयू के भारत कला म्यूजियम में रखी पाण्डलुपियों को अब सजगता बरतते हुए जल्द ही इन पांडुलिपियों को डिजिटल स्वरूप में लाने की कवायद शुरू कर दी गई है. यहां सुरक्षित रखी गई साढ़े पांच हजार प्राचीन पांडुलिपियों पर नष्ट होने का खतरा मंडरा रहा है. इस म्यूजियम में वेदों, रामायण व आयुर्वेद से लेकर लगभग सभी कर्मकांडों से संबंधित ग्रंथों की मूल व प्रथम प्रतिलिपियां भी संरक्षित की गई हैं. इसके अलावा मूल 'काशी खंड' के कई भाग भी यहां पर मौजूद हैं, मगर उचित रखरखाव के बगैर इनका अस्तित्व खतरे में है. इसके लिए अम्ल पेपर व बांस पेपर से लपेट कर संरक्षित की गई पाण्डलुपियों को डिजिटल स्वरूप में बदलने की कवायद की जा रही है.

भारत कला भवन के सहायक संग्रहालयाध्यक्ष विनोद कुमार ने बताया कि करीब 5500 पांडुलिपियों में से मात्र 2600 को ही अम्ल पेपर से संरक्षित किया गया है, जबकि बाकी बांस पेपर से लपेट कर रखी गई हैं. इनके अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए इसमें रखे गए कई महान व्यक्तित्वों के से संबंधित मूल दस्तावेज, चिट्ठियों, शोध और अनुसंधानों को संरक्षित करना अब बेहद जरूरी है. इस बारे भारत कला भवन म्यूजियम की उप निदेशक डा. जसमिदर कौर ने बताया कि भारत कला भवन में शेष बचे कार्यो के पूर्ण होते ही पांडुलिपियों को डिजिटल स्वरूप देने पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा. डिजिटल प्रारूप तैयार करने वाली संस्थाओं से बातचीत कर एक रूप-रेखा बनाई जा रही है. जल्द ही पांडुलिपियों को डिजिटल फार्मेट में सरलतापूर्वक पढ़ा व समझा जा सकेगा. अध्यन कर रहे शोधार्थी छात्र इनमें उद्धरत बातों को स्रोत की तरह उपयोग कर सकते हैं.

वाराणसी: राजीव गांधी की प्रतिमा से छेड़छाड़ पर भड़के कांग्रेसी, कार्रवाई की मांग

उन्होंने बताया कि सार्वजनिक रूप से भले ही यह म्यूजियम विगत कई माह से बंद रहा हो परंतु यहां रखे गए उपकरणों के डिजिटलीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है. अभी तक सिक्के, पेंटिग, टेक्सटाइल, आर्कियोलाजी, धातु व पत्थरों के डिजिटलीकरण का साठ फीसदी कार्य पूर्ण हो चुका है, शेष कार्य इस साल के अंत तक पूरा हो जाएगा.

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें