करीब 350 साल बाद विश्वनाथ मंदिर के प्रधान शिवालय का हिस्सा बनेगा ज्ञानवापी कूप

Smart News Team, Last updated: 17/10/2020 03:09 PM IST
  • सदियों पहले विश्वनाथ मंदिर परिसर का हिस्सा रहे ज्ञानवापी कूप को अब फिर से प्रधान शिवालय का हिस्सा बनाया जाएगा. 
काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर को फिर से ज्ञानवापी कूप को शामिल किया जाएगा.

वाराणसी: पौराणिक ज्ञानवापी कूप जल्द ही काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रधान शिवालय का हिस्सा बनने वाला है. काशी विश्वनाथ कारिडोर के निर्माण के तहत करीब साढ़े तीन सौ साल बाद यह प्रधान शिवालय आदि विश्वेश्वर मंदिर के परिक्रमा मंडप में यह शामिल किया जाएगा.

जानकारी के मुताबिक विश्वनाथ मंदिर गर्भगृह के चारों ओर तैयार विशाल परिक्रमा मंडप ज्ञानवापी के उत्तरी हिस्से में आकार लेने लगा है. कॉरिडोर पूरब से पश्चिम की ओर बढ़ रहे इस मंडप का निर्माण खूबसूरत मेहराबदार पत्थरों से काराया जा रहा है. पूरब से पश्चिम की ओर करीब 40 फुट आगे बढ़ते ही यह परिक्रमा मंडप, ज्ञानवापी कूप को अपनी परिधि में ले लेगा. यह दूरी अब चंद फुट की ही रह गई है. इतिहासकार बताते हैं कि औरंगजेब काल में मंदिर तोड़े जाने से पहले ज्ञानवापी और ज्ञानवापी कूप आदिवश्वेश्वर मंदिर परिसर में ही थे. प्रोजेक्ट प्रभारी शशिकांत ने बताया कि परिक्रमा मंडप बनाने के लिए मुख्य मंदिर के चारों तरफ बेस तैयार कर लिया गया है. दस फुट चौड़े और छह फुट गहरे सीमेंटेड बेस पर 70 फुट लंबे और 30 फुट चौड़े परिक्रमा मंडप को आकार देने में 157 जोड़ी खम्भों का इस्तेमाल किया जाएगा.

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गौरतलब है कि भारत पर लंबे समय तक शासन करने वाले मुगल बादशाह औरंगजेब ने 18 अप्रैल 1669 को फरमान जारी करके काशी के ज्ञानवापी स्थित तत्कालीन आदिविश्वेश्वर मंदिर को ध्वस्त करने का आदेश दिया था. बादशाह का हुक्म मिलते ही मुगल सेना ने आक्रमण करके मंदिर ध्वस्त करने के बाद बादशाह के निर्देशानुसार मंदिर के मलबे से उसी स्थान पर मस्जिद बना दी.

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लोगों का मानना है कि ज्ञानवापी और काशी एक दूसरे के पूरक हैं. काशी का मतलब होता है ज्ञान का प्रकाश एवं ज्ञानवापी का मतलब है ज्ञानतत्व से पूर्ण जलयुक्त विशेष आकृति का तालाब. स्कंदपुराण के काशीखंड में ज्ञानवापी का जिक्र मिलता है. विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी बताते हैं कि मुगल सेना, आदि विश्वेश्वर लिंग को क्षति न पहुंचा दे, इसलिए उनके पूर्वज आठ बालिश्त (बित्ता) ऊंचे पन्ना के शिवलिंग को लेकर ज्ञानवापी कूप में ही कूद कर थे, जिसका सीधा संपर्क गंगा से है.

 

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