Diwali 2021: 677 साल बाद 28 अक्टूबर को बन रहा गुरु पुष्य नक्षत्र पर दुर्लभ योग, जमकर करें खरीदारी

Anurag Gupta1, Last updated: Wed, 27th Oct 2021, 11:17 AM IST
  • 677 साल बाद गुरु पुष्य नक्षत्र आ रहा है इस दिन खरीदारी करना फलदायक होता है. इस दिन निवेश करने से काफी लाभ मिलता है. ज्योतिषाचार्यो के अनुसार गुरु-पुष्य योग में शनि और गुरु दोनों ही मकर राशि में विराजमान रहेंगे. पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि देव हैं और देवता देव गुरु बृहस्पति हैं.
677 साल बाद बन रहा गुरु पुष्य नक्षत्र (प्रतीकात्मक फोटो)

अक्सर लोग दीवाली से पहले धनतेरस को खरीदारी करने को शुभ मानते है लेकिन इस साल दीवाली के पहले 28 अक्टूबर को पुष्य नक्षत्र (Guru Pushya Nakshatra) आ रहा है जो कई मायनों में काफी शुभ माना जा रहा है. पुष्य नक्षत्र के दिन खरीदारी को काफी शुभ माना जाता है. मान्यता है इस दिन निवेश करने से शुभ लाभ होता है और सभी मनोकामना पूरी होती है. ज्योतिषाचार्य का मानना है ऐसे योग बहुत कम बनते है इस साल ऐसा योग 677 साल बाद बना है.

28 अक्टूबर को पूरे दिन पुष्य नक्षण रहेगा. इस पूरे दिन अमृत सिध्दि योग, सर्वार्थ सिध्दि योग भी रहेगा. इस योग में कोई भी वस्तु खरीदना फलदायक है इसलिए लोग इस दिन निवेश करते हैं. माना जाता है शनि पुष्य नक्षत्र के स्वामी हैं. इसलिए शनिवार को या शनि के नक्षत्र में किया गया काम लंबे समय तक चलता है. यह योग हर तरीके से लाभकारी होता है. 677 साल पहले 5 नवंबर 1344 को भी गुरू-शनि की युति मकर राशि में रहते पुष्य योग गुरूवार को बना था.

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कब से कब तक रहेगा पुष्य नक्षत्र:

गुरुवार को कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है. इस दिन 28 अक्टूबर को पुष्य नक्षत्र प्रात: 09 बजकर 41 मिनट से होगा और 29 अक्टूबर को प्रात: 11 बजकर 39 मिनट तक रहेगा. गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र पड़ रहा है, इसलिए इसे गुरु पुष्य नक्षत्र भी कहा जाता है. पुष्य नक्षत्र के दिन चंद्रमा कर्क राशि में विराजमान रहेगा. इस नक्षत्र में खरीदारी करना बहुत ही शुभ माना गया है.

677 साल बाद बन रहा है विशेष संयोग:

ज्योतिषाचार्यो का मानना 677 साल बाद गुरु-पुष्य योग में शनि और गुरु दोनों ही मकर राशि में विराजमान रहेंगे. ऐसे योग में खरीदारी और निवेश करना फलदायक होता है. ये मुहूर्त इस साल 28 अक्टूबर दिन गुरूवार को दीवाली से पहले पड़ रहा है. ज्योतिषाचार्यो ने बताया कि पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि देव हैं और देवता देव गुरु बृहस्पति हैं.

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