41 साल से बॉक्स में बंद टेलीस्कोप आकाशीय उथल-पुथल से अनजान हो रहे ज्योतिष छात्र

Smart News Team, Last updated: 05/12/2020 07:04 PM IST
  • इसे शिक्षा के प्रति उदासीनता ही कहेंगे की ग्रह नक्षत्रों की चाल से भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं की गणना करने में सहायक संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की टेलीस्कोप पिछले 41 साल से एक बक्से में बंद है. राज्यपाल से लेकर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री की कवायद के बावजूद टेलीस्कोप स्थापित नहीं हो सका.
फाइल फोटो

वाराणसी. बता दें कि पृथ्वी से आकाशीय तथा नक्षत्रों की आसानी से गणना करने हेतु ज्योतिष शास्त्र के छात्रों के लिए यूजीसी के सहयोग से संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से साल 1979 में टेलीस्कोप मंगाई गई थी. उस जमाने की उच्च क्वालिटी की टेलीस्कोप में अब्बल दर्जे के लेंसों के अलावा छोटे-छोटे 7 से 8 यंत्र भी लगे थे. इन्हीं यंत्रों की मदद से पृथ्वी से आकाश ई ग्रेड में छात्रों की आसानी से गणना की जा सकती थी. यही नहीं इस टेलीस्कोप आकाश में करोड़ों की संख्या में घूम रहे धूमकेतु तारा आदि का अध्ययन करने में भी सहायक हो सकती थी. किंतु टेलीस्कोप स्थापित करने में विश्वविद्यालय की उदासीनता की झलक साफ देखी जा सकती है. ऐसा नहीं है कि विश्वविद्यालय कैंपस में टेलिस्कोप लगाने के लिए सरकार की ओर से मदद नहीं की गई.

साल 1992 में तत्कालीन कुलपति प्रोफेसर विद्यानिवास मिश्र ने संस्कृत विश्वविद्यालय में सरकार के सहयोग से एक बेड साला का भी निर्माण कराया. जिसका उद्घाटन तत्कालीन राज्यपाल वी सत नारायण रेड्डी ने 23 अगस्त 1992 को किया. इसी वेधशाला की 72 फुट की ऊंचाई पर टेलीस्कोप को स्थापित किया जाना था. विश्वविद्यालय की ओर से वेधशाला भी बनवाई गई किंतु टेलीस्कोप लगाने के लिए परंपरागत वेधशाला का निर्माण ना हो सका. जिस कारण कैंपस परिसर में पाली भवन मैं आधुनिक वेधशाला का प्रस्ताव तैयार किया गया जिसकी आधारशिला तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने जनवरी 2004 में आधारशिला रखी. आधारशिला रखे जाने से लेकर अब तक उक्त स्थान पर वेधशाला का निर्माण कराने के लिए एक भी ईंट नहीं रखी जा सके जिस कारण आधुनिक वेधशाला निर्माण की योजना विश्वविद्यालय की उदासीनता के चलते दम तोड़ गई.

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इस संबंध में विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष अमित कुमार शुक्ला कहते हैं कि आकाशी गतिविधियों के अध्ययन के लिए टेलीस्कोप काफी उपयोगी है. कुलपति प्रोफेसर राजाराम शुक्ला टेलिस्कोप स्थापित करने के लिए गंभीरता से विचार कर रहे हैं. फिलहाल लंबे समय से बक्से में बंद टेलीस्कोप की मौजूदा स्थिति क्या है इसके लिए विशेषज्ञों को विश्वविद्यालय की ओर से जांच हेतु बुलाया गया है.

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