वाराणसी के भैरव बाबा मंदिर में नगाड़ा बजाने वाले पर बरसती है बाबा की खास कृपा

Smart News Team, Last updated: Mon, 2nd Aug 2021, 9:58 PM IST
  • मंदिर में दिन में तीन बार आरती होती है. मान्यता है कि मंदिर में पूजा या फिर आरती के दौरान जो भी कोई नगाड़ा बजाता है, बाबा की उसपर विशेष कृपा होती है.
मान्यता है कि बाबा भैरवनाथ के दोनों रूपों के दर्शन करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है.

शिव की नगरी काशी में भक्ति की अद्भुत छटा देखने को मिलती है. वाराणसी को मंदिरों और घाटों का शहर भी कहा जाता है. वाराणसी में स्थित हर मंदिर की अपनी एक अलग विशेषता है. यहां स्थित मंदिरों में से एक प्रमुख मंदिर है, जिसका नाम काल भैरव है. यह मंदिर भगवान शिव के उग्र रूप यानी काल भैरव को समर्पित है. मान्यता है कि काशी भगवान शिव की सबसे प्रिय नगरी है, इसलिए उन्होंने काशी की रक्षा के लिए काल भैरव को यहां का क्षेत्रपाल नियुक्त किया था. खास बात यह है कि इस मंदिर में भैरव जी को प्रसाद के रूप में मदिरा चढ़ाई जाती है.

मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ के दर्शन के बाद काल भैरव के दर्शन जरूर करने चाहिए. अगर ऐसा नहीं किया तो बाबा विश्वनाथ के दर्शन अधूरे माने जाते हैं. काशी के कमच्छा क्षेत्र में स्थित इस मंदिर में बाबा भैरवनाथ दो स्वरूपों में विराजते हैं. मान्यता है कि बाबा भैरवनाथ के दोनों रूपों के दर्शन करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. वहीं, जिन लोगों पर ग्रह बाधा है, बाबा भैरवनाथ के दर्शन से वह भी दूर हो जाती है.

इस मंदिर में बाबा भैरवनाथ आदि भैरव के रूप में भी विराजमान है.

पहला रूप: काल भैरव मंदिर में बाबा भैरवनाथ का पहला रूप बटुक भैरव विराजमान है. यह बाबा का बाल रूप है. कहा जाता है कि इनके दर्शन से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं. वहीं, जो लोग पुत्र प्राप्ति की अभिलाषा रखते हैं, उनकी मन्नत भी पूरी हो जाती है.

दूसरा रूप: इस मंदिर में बाबा भैरवनाथ आदि भैरव के रूप में भी विराजमान है. यह भी उनका बाल रूप है. मान्यता है कि आदि भैरव के दर्शन से राहू-केतू की बाधा दूर हो जाती है. बता दें, रविवार के दिन विशेष रूप से इस मंदिर में भारी भीड़ लगती है.

काल भैरव के इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां पर आरती के दौरान नगाड़े बजाए जाते हैं.

आरती के दौरान बजाए जाते हैं नगाड़े: काल भैरव के इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां पर आरती के दौरान नगाड़े बजाए जाते हैं. मंदिर में दिन में तीन बार आरती होती है. मान्यता है कि मंदिर में पूजा या फिर आरती के दौरान जो भी कोई नगाड़ा बजाता है, बाबा की उसपर विशेष कृपा होती है.

कैसे पहुंचे: वाराणसी के काल भैरव मंदिर में आप हवाई रास्ते, रेलवे स्टेशन और सड़क मार्ग के जरिए पहुंच सकते हैं. मंदिर के निकटतम लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो काल भैरव मंदिर से लगभग 23.7 किमी दूर है. मंदिर के सबसे नजदीक वाराणसी जंक्शन है, जो 3.9 किलोमीटर दूर है. आप यहां पर ऑटो रिक्शा या फिर टैक्सी के जरिए मंदिर तक पहुंच सकते हैं.

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