परमाणु दवाइयों पर शोध कार्य करने का विचार कर रहा है बीएचयू

Smart News Team, Last updated: 15/12/2020 05:58 PM IST
  • बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान मैं परमाणु दवाइयां एक बार फिर से बनाए जाने को लेकर संभावना जन्म लेने लगी है. यह भी कयास लगाए जाने लगे हैं कि परमाणु दवाई बनाने को लेकर जल्द ही बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में एक नया विभाग अस्तित्व में आ सकता है.
बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान मैं परमाणु दवाइयां एक बार फिर से बनाए जाने को लेकर संभावना

वाराणसी . बता दें कि 90 के दशक में विश्वविद्यालय के चिकित्सा विभाग संस्थान में रेडियोथैरेपी एंड रेडिएशन मेडिसिन विभाग के अधीन न्यूक्लियर मेडिसिन बनाने का काम हुआ करता था. तत्कालीन चिकित्सक डॉक्टर उडप्पा के सेवा काल के समय परमाणु दवाई बनाने को लेकर कई शोध कार्य भी किए गए थे. लेकिन उनकी सेवा काल पूरे होते ही परमाणु दवाई बनाने का कार्य पूरी तरह ठप हो गया. परमाणु दवाई बनाने के लिए इस बीच कई बार पहल भी की गई लेकिन अपेक्षित सहयोग व रुचि के अभाव में सारे प्रयास असफल साबित हो गए.

फिलहाल चिकित्सा विज्ञान संस्थान यानी आईएमएस में मौजूदा समय में एनेस्थीसिया, एनाटॉमी, बायोकेमिस्ट्री, कार्डियोलॉजी, कार्डियोथोरेसिक सर्जरी, डर्मोटोलॉजी, एंडोक्राइनोलॉजी, फॉरेंसिक मेडिसिन, जिरियाट्रिक मेडिसिन, माइक्रोबायोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, गाइनेकोलॉजी, नेत्र रोग, आर्थोपेडिक, पीडियाट्रिक, पीडियाट्रिक सर्जरी, पैथोलॉजी, फिजियोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, रेडियोलॉजी, रेडियोथैरेपी एंड रेडिएशन, सर्जिकल ऑंकोलॉजी, जनरल सर्जरी, यूरोलॉजी सहित तीन दर्जन से अधिक मॉडर्न मेडिसिन के विभाग कार्यरत है. चिकित्सा विज्ञान संस्थान तकरीबन डेढ़ दर्जन से अधिक और नए विभाग खोले जाने का विचार कर रहा है.

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इस संबंध में सर सुंदरलाल अस्पताल के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर ओपी उपाध्याय बताते हैं कि नए विभाग बनाने के लिए प्रस्ताव पहले ही भेजा जा चुका है इन विभागों का विस्तार 3 फेज में होना है वही संस्थान के डीएन आफ एकेडमिक प्रोफेसर ओपी मिश्रा ने बताया कि नए विभाग को लेकर प्रक्रिया चल रही है बताया कि हाल ही में न्यूक्लियर विभाग से जुड़े पीजीआई चंडीगढ़ के प्रोफेसर एंड हेड डॉक्टर बीआर मेटल का आईएमएस में तबादला हुआ है उनके पदभार ग्रहण करने के बाद ही न्यूक्लियर विभाग को एक बार फिर से शुरू कराए जाने को लेकर प्रयास किए जाएंगे.

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