काशी के धार्मिक ऐतिहासिक व सांस्कृतिक धरोहर से संबंधित पीजी कोर्स शुरू करेगा BHU

Smart News Team, Last updated: 14/12/2020 06:49 PM IST
  • काशी के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ने बनारस के ऐतिहासिक सांस्कृतिक पौराणिक धरोहरों से संबंधित पीजी कोर्स शुरू करने की मंजूरी दी है. परास्नातक के इस कोर्स में बनारस के प्रसिद्ध लंगड़ा आम से लेकर उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के संगीत से संबंधित पाठ्यक्रम पर शोध किए जाएंगे.
BHU ने बनारस के ऐतिहासिक सांस्कृतिक पौराणिक धरोहरों से संबंधित पीजी कोर्स शुरू करने की मंजूरी दी है

वाराणसी . इस कोर्स में काशी के ऐतिहासिक शहर की धरोहरों की सारी जानकारियों के अलावा संगीत घरानों को भी पढ़ाया जाएगा. बीएचयू में काशी स्टडीज के नाम से यह नया कोर्स शुरू किया जाएगा. इस कोर्स में विदेशी छात्र भी प्रवेश ले सकेंगे. इसका शिक्षा सत्र 2021-22 के लिए शुरू किया जाएगा. जुलाई माह में प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाएगी. सामाजिक विज्ञान संकाय से संबंधित इस कोर्स में भारतीय के साथ विदेशी छात्र भी प्रवेश ले सकेंगे.

बता दें कि काशी धर्म संस्कृति संगीत परंपरा और शिल्पियों की धात्री रही है. काशी से हमेशा देश के लोग ही नहीं बल्कि विदेशी भी धार्मिक आस्था के तहत आकर्षित होते रहे हैं. पुरानी कहावत भी है काशी कबहु ना छोड़िए विश्वनाथ का धाम मरने पर गंगा मिले जियते लंगड़ा आम, अब यह पुरानी कहावत भी काशी स्टडी के नाम से बीएचयू की ओर से शुरू किए जा रहे पीजी कोर्स में चित्रार्थ नजर आएगी. इस नए कोर्स को विश्वविद्यालय प्रशासन ने मंजूरी दे दी है. इस कोर्स को सामाजिक संकाय विभाग से संबद्ध किया गया है. इस नए कोर्स के प्रस्ताव को अगले माह जनवरी में विश्वविद्यालय के एकेडमिक काउंसिल के समक्ष पेश किया जाएगा. बाद इसके एग्जीक्यूटिव काउंसिल इस पर अपनी अंतिम मुहर लगाएगा.

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इस नए कोर्स के बारे में जानकारी देते हुए सामाजिक संकाय के डीन प्रोफेसर कौशल किशोर मिश्रा ने बताया कि 2 साल के इस पीजी कोर्स में 4 सेमेस्टर पढ़ाई जाएंगे. इनमें छात्र काशी की संस्कृति इतिहास परंपरा धार्मिक महत्व बनारसी फक्कड़पन के साथ ही काशी की प्रसिद्ध गुलाबी मीनाकारी बनारसी रेशम के उत्पाद बनारसी पान लकड़ी के खिलौने लंगड़ा आम का करीब से अध्ययन कर सकेंगे. इसके साथ ही कोर्स में तुलसीदास कबीर दास मुंशी प्रेमचंद बुध रैदास आदि महान साहित्यकारों को पाठ्यक्रम में स्थान दिया जाएगा. प्रोफेसर श्री मिश्रा ने बताया कि एसपीजी के नए कोर्स में भारत रत्न बिस्मिल्लाह खान की शहनाई की तान पदम सम्मानित पंडित किशन महाराज की तबले की थाप के साथ ही बनारस घराने की संगीत की सुर लय और ताल को भी पाठ्यक्रम में स्थान दिया जाएगा.

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