देश में पहली बार एनवायर्नमेंटल हाइड्रोलॉजी का कोर्स शुरू करेगी बीएचयू

Smart News Team, Last updated: Thu, 25th Feb 2021, 12:55 PM IST
  • बनारस हिंदू विश्वविद्यालय देश में पहली बार एनवायर्नमेंटल हाइड्रोलॉजी का कोर्स शुरू करने जा रही है. इसके लिए काशी प्रवास पर आए ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त बेरी ओ फेरल ने अपनी सहमति जताई है.
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (फाइल तस्वीर)

वाराणसी: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में एनवायरमेंटल हाइड्रोलॉजी के शुरू किए जा रहे कोर्स के आरंभिक स्तर पर इस में मास्टर डिग्री के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है. इस पाठ्यक्रम में पानी की समस्याओं से तकनीकी आधार पर निपटने की विषय वस्तु को शामिल किया जाएगा. इस कोर्स में भारत के रिवर बेसिन सिस्टम, मरूभूमि, सूखे और रेतीले क्षेत्रों में धरा जल की पर्याप्तता और जल की गुणवत्ता को बेहतर करने पर कार्य किया जाएगा. काशीपुर प्रवास पर आए ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त बेरी ओ फेरल बीएचयू के विज्ञान संस्थान में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे.

इसी कार्यक्रम में ग्लोबल मांगों पर एक एनवायर्नमेंटल हाइड्रोलॉजी कोर्ट के प्रस्ताव की जानकारी सामने आई. इस कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त ने कहा कि गंगा जितना बड़ा रिजर्वेशन सिस्टम ऑस्ट्रेलिया में नहीं है. इस विधा की पढ़ाई के लिए बनारस ही सबसे बेहतर स्थल है. उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया का अधिकतर क्षेत्र मरुस्थलीय है जिस कारण से जल संकट को खत्म करने के लिए कई नई तकनीकों का सफल प्रयोग किया गया है. अब भारत में भी इन्हीं तकनीक के आधार पर जल्द ही देश में पानी की समस्याओं से निपटा जा सकेगा. एनवायर्नमेंटल हाइड्रोलॉजी कोर्स के प्रस्तावक विज्ञान संकाय के प्रमुख प्रोफेसर मल्लिकार्जुन जोशी और डॉक्टर एसपी राय है.

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इस पर प्रोफेसर जोशी ने बताया कि पर्याप्त जल होते हुए भी भारत का कई ऐसा गर्मियों में जल संकट और सूखे की चपेट में आता है. इससे बचने के लिए देश में इस कोर्स के तहत जल संग्रह की तकनीक पर व्यापक शोध होगा. उन्होंने बताया कि हिमालय और भावर इलाके के दरारों में जहां पानी जमा होते हैं वहां हेड वाटर मैनेजमेंट के तहत बारिश के पानी को रोकने की व्यवस्था की जाएगी. उन्होंने बताया कि आस्ट्रेलिया की तर्ज पर इस क्षेत्र में भी काफी मात्रा में तालाब टैंक ड्रेनेज और गड्ढे आदि बनाकर अतिरिक्त जल को संगठित करके इसे गंगा घाटी में गर्मी के दिनों में छोड़ा जाएगा.

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