बनारस की बीटेक की छात्राओं ने बनाया ग्लेशियर अलर्ट सिस्टम

Smart News Team, Last updated: Fri, 26th Feb 2021, 2:38 PM IST
  • वाराणसी की बीटेक की छात्राओं ने एक ग्लेशियर अलर्ट सिस्टम बनाया है जो हिमालयी क्षेत्र में आने वाले आपदा व प्रकोप से कुछ समय पहले ही अलर्ट सिगनल प्रसारित करेगा. इस अलर्ट सिग्नल के कारण आने वाले समय में पहाड़ों पर हादसों से होने वाले नुकसान को कम करने में आसानी होगी.
प्रतीकात्मक तस्वीर

वाराणसी: यह छात्राएं बनारस के अशोका इंस्टीट्यूट की बीटेक इलेक्ट्रॉनिक प्रथम वर्ष की है. इन छात्राओं ने इस ग्लेशियर अलर्ट सिस्टम को महज 10 दिनों में ही बनाकर तैयार किया है.बीटेक इलेक्ट्रॉनिक प्रथम वर्ष की छात्राएं अन्नू सिंह आंचल पटेल और संजीवनी यादव ने ऐसा सेंसर युक्त ग्लेशियर एंड सिस्टम तैयार किया है जिसमें ट्रांसमीटर अलर्ट सेंसर पर आधारित एक अलार्म है, जिसको ग्लेशियर, डैम और दुर्गम इलाके के आसपास बसे गांवों और शहरों की सुरक्षा हेतु उपयोग किया जा सकता है. इस ग्लेशियर अलर्ट सिस्टम को बनाने वाली छात्राएं अन्नू सिंह आंचल पटेल और संजीवनी यादव बताती हैं कि पहाड़ों पर बाढ़, हिमस्खलन, ग्लेशियर स्लाइड व अन्य कई आपदाओं के आने से कुछ देर पहले ही यह सेंसर युक्त अलर्ट सिस्टम संकेत देने लगता है.

इन छात्राओं ने बताया कि इससे 1 सेकंड में 1 किलोमीटर की रेंज में अलार्म के द्वारा सूचना पहुंच जाती है, जिससे शासन-प्रशासन समय रहते संकट से निपट सकता है. इन छात्राओं ने बताया कि इस मशीन को बिजली की भी जरूरत नहीं होती है क्योंकि यह सोलर ऊर्जा से चलता है. वही इसे 1 घंटे तक चार्ज कर दिया जाए तो यह तकरीबन 6 माह तक लगातार कार्य करता है. अशोका इंस्टीट्यूट संस्थान के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल के इंचार्ज श्याम चौरसिया ने बताया कि इससे उत्तराखंड जैसे राज्यों में आ रहे भीषण हादसा और अपनी जान गवा रहे हजारों लोगों को बचाया जा सकता है. इसे बनाने में लोहे की पाइप, सोलर प्लेट, बोल्ट, ट्रिगर, स्विच, रिले, 12 वोल्ट बैटरी, हाई रेडियो फ्रीक्वेंसी, सिग्नल किट, कार रेड लाइट और ऊपर का प्रयोग किया गया है. 

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उन्होंने बताया कि इस ग्लेशियर सिस्टम को तैयार करने में 7000 का खर्च आया है. इस ग्लेशियर अलर्ट सेंसर युक्त मशीन को बनाने वाली छात्राएं बताती है कि हाल ही में उत्तराखंड में आई आपदा ने सभी के दिलों को झकझोर कर रख दिया था. इस हादसे ने हमारे दिलों को भी काफी प्रभावित किया. इसी हादसे की वजह से हमारे जेहन में इस तरह के सेंसर अलर्ट मशीन बनाने विचार आया था. इन छात्राओं ने बताया कि आपदा से पूर्व लोगों तक संकेत पहुंचाने की तकनीक पर काम किया. प्रोटोटाइप सिस्टम तैयार कर उसका बाकायदा कई जगह ट्रायल किया गया है.बताया कि अगर पहाड़ों पर इसे स्थापित किया जाए तो अचानक होने वाले प्राकृतिक हादसों से लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है.

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