Chanakya Niti : भाग्य के सहारे रहने वाले लोग हो जाते हैं बर्बाद, जानें आचार्य चाणक्य की ये बातें

Priya Gupta, Last updated: Mon, 27th Sep 2021, 12:29 PM IST
  • Chanakya Niti : नीतिशास्त्र में ऐसी बातों के बारे में बताया है जिन्हें त्याग देना ही फायदेमंद होता है.अपने इस ग्रंथ के जरिए उन्होंने जीवन के हर समय आने वाली कठिनाओं के समाधन की ओर भी ध्‍यान दिलाया है.
Chanakya Niti

आचार्य चाणक्य ने अपनी किताब नीतिशास्त्र में जीवन से जुड़े तमाम पहलुओं का जिक्र किया है. नीतिशास्त्र में ऐसी बातों के बारे में बताया है जिन्हें त्याग देना ही फायदेमंद होता है.अपने इस ग्रंथ के जरिए उन्होंने जीवन के हर समय आने वाली कठिनाओं के समाधन की ओर भी ध्‍यान दिलाया है. चाणक्य नीति में कहा गया है कि सुख की कामना करने के लिए हमें किन चीजों का त्याग करना होगा, एक राजा और प्रजा को कैसा व्यवहार करना चाहिए और जो भाग्य के सहारे चलता है उसका क्या होता है? आप भी जानिए चाणक्‍य नीति की ये कुछ महत्‍वपूर्ण बातें.

भाग्य के सहारे चलने वाला

चाणक्य नीति के अनुसार, जो भविष्य के लिए तैयार है और जो किसी भी परिस्थिति को चतुराई से निपटता है. लेकिन जो आदमी सिर्फ भाग्य के सहारे चलता है, वह बर्बाद होता है.

बातों को बढ़ा चढ़ाकर बताना

कुछ लोग अपनी दूसरे सामने अपनी बातों को बढ़ा- चढ़ाकर दिखाते हैं. ये लोग दूसरों के सामने खुद को धनवान और प्रतिभावान दिखाने की कोशिश करते हैं. इस तरह के लोगों का जब भांड़ा फूटता है तो दूसरों के सामने लज्जित होना पड़ता है. चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को कभी भी अपने साधारण व्यक्तित्व को लेकर झूठ नहीं बोलना चाहिए. अपने संस्कार और बुद्धि पर भरोसा होना चाहिए.

सुख की कामना

चाणक्य नीति के अनुसार जो व्यक्ति अपने घर के लोगों से बहुत आसक्ति ( Affection) रखता है वह भय और दुख को पाता है. आसक्ति ही दुख का मूल है. जिसे सुखी होना है उसे आसक्ति छोडनी पड़ेगी.

कौन कब प्रसन्न होता है

आचार्य चाणक्य के अनुसार, देवताओं-संत जनों का-पालकों का स्वभाव है कि वे जल्दी प्रसन्न हो जाते है. निकट के और दूर के रिश्तेदार तब प्रसन्न होते है, जब उनका आदर सम्मान किया जाए. उनके नहाने का, खाने पीने का प्रबंध किया जाए. पंडित जन तब प्रसन्न होते हैं जब उन्हें अध्यात्मिक सन्देश का मौका दिया जाता है.

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