भारतीय सिनेमा से गायब हुए संस्कृति सभ्यता और नैतिक मूल्य, सेंसर बोर्ड बेमानी

Smart News Team, Last updated: Sat, 13th Feb 2021, 1:12 PM IST
  • भारतीय सिनेमा से संस्कृति सभ्यता और नैतिक मूल्य पूरी तरह गायब हो चुके हैं. फिल्मों की नैतिक छवि को बरकरार रखने के लिए बनाया गया सेंसर बोर्ड पूरी तरह बेमानी साबित हो रहा है.
प्रतीकात्मक तस्वीर

वाराणसी : मौजूदा भारतीय सिनेमा और सेंसर बोर्ड पर यह चुटीला प्रहार टीवी सीरियल चंद्रकांता धारावाहिक में क्रूर सिंह की भूमिका निभाने वाले मशहूर फिल्म अभिनेता अखिलेंद्र मिश्र ने किया है. महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के शताब्दी वर्ष महोत्सव में शामिल होने आई अभिनेता अखिलेंद्र मिश्र ने यह बात पत्रकारों से बात करते हुए कहीं. उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा से भारत ही गायब है. सिनेमाओं में अब भारतीय संस्कृति सभ्यता नैतिक मूल्य देखने को नहीं मिलता है. सेंसर बोर्ड का कोई मतलब नहीं रह गया है. 

फिल्मों व वेब सीरीज में अश्लीलता रोकने के लिए सरकार को कड़े कानून बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि वेब सीरीज में बेडरूम तक के सीन दिखाए जा रहे हैं. इसे रोकना जरूरी है. कहा कि पहले समाज में जो घटनाएं होती थी उस पर फिल्में बनती थी लेकिन अब फिल्में देखकर घटनाएं हो रही हैं. ऐसे में अंकुश इन पर लगाना बेहद जरूरी हो गया है. एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि अभिनय एक आध्यात्मिक साधना है. ऐसे में इसकी प्रतिष्ठा बनाए रखने की जरूरत है.अपने कैरियर का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि उन्हें बचपन से ही अभिनय का शौक था. पढ़ाई के समय में भी गांव में थिएटर करता था. 

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उन्होंने बताया कि टीवी सीरियल चंद्रकांता धारावाहिक से मुझे पहचान मिली. रामायण में भी रावण सहित विभिन्न टेली फिल्मों में काम कर चुका हूं. चंद्रशेखर आजाद का भी किरदार निभा चुका हूं मेरे लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा. बताया कि हमारी पहली फिल्म वीरगति थी. इसके बाद सरफरोश लगान जैसी हिट फिल्म में भी काम कर चुका हूं. जल्द ही दो फिल्में और आने वाली है. कहा की जिस संस्था से चंद्र शेखर आजाद लाल बहादुर शास्त्री पढ़े हो, उस संस्था में मेरी किताब अखिलामृतम का विमोचन गर्व की बात है.

 

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