Dev Deepawali 2021: कब है देव दीपावली, क्या है मुहूर्त और धार्मिक महत्व

Pallawi Kumari, Last updated: Tue, 9th Nov 2021, 12:44 PM IST
  • दिवाली के 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा व देव दीपावली का पर्व देशभर में धूमधाम के साथ मनाया जाता है. साथ ही इस दिन कार्तिक मास का स्नान भी किया जाता है. इस दिन दीप दान को देव दीपावली कहा जाता है. इस साल देव दीपावली का पर्व 18 नवंबर को मनाया जाएगा.
देव दीपावली का धार्मिक महत्व.

हिंदू धर्म में देव दीपावली का काफी महत्व है. दिवाली के 15 दिन बाद और कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीपावली का त्योहार मनाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन गंगा नदी पर स्नान करने के लिए पृथ्वी पर आते हैं. इसलिए देव दीपावली के दिन गंगा नदी घाट को दीपों से सजाया जाता है वाराणसी में देव दीपावली को लेकर कई दिनों से खूब तैयारी चल रही है. आइये जानते हैं देव दीपावली से जुड़े धार्मिक महत्व , इसकी पूजा विधि और मुहूर्त के बारे में.

देव दीपावली का धार्मिक महत्व- पौराणिक कथा के अनुसार कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था. इसलिए इसे त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है. इसी उपलक्ष्य में देव दीपावली मनाई जाती है. एक और मान्यता यह भी है कि, कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान विष्णु ने मत्स्यावतार धारण किया था. कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही सिख गुरु नानक देव जी का जन्म भी हुआ था. इसलिए इसे नानक पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है.

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देव दीपावली पूजा विधि-कार्तिक पूर्णिका के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. इस दिन गंगा स्नान करने के विधान है, इसलिए गंगा घाट पर लाखों श्रद्धालु इस दिन स्नान करते हैं. अगर गंगा स्नन करना संभव न हो तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान कर लें. फिर भगवान गणेश, शिव और भगवान विष्णु की पूजा करें.

शाम को फिर से पूजा करें और - ॐ नम: शिवाय’मंत्रों का जाप करें. भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले वस्त्र और पीली मिठाई का भोग लगाएं. इसी दिन तुलसी विवाह का भी समापन होता है कि इसलिए  तुलसी जी के पास भी एक दीपक जलाएं.

देव दीपावली शुभ मुहूर्त-

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 18 नवंबर, गुरुवार दोपहर 12 बजे   

पूर्णिमा तिथि समाप्त: 19 नवंबर, शुक्रवार दोपहर 02:26 मिनट

प्रदोष काल मुहूर्त: 18 नवंबर सायं 05:09 से 07:47 मिनट तक 

पूजा अवधि: 2 घंटे 38 मिनट

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