कोरोना के चलते सोमवती अमावस पर गंगा स्नान से दूरी बनाए रहे श्रद्धालु

Smart News Team, Last updated: Tue, 15th Dec 2020, 11:00 PM IST
  • इसे कोरोना काल का प्रभाव ही कहेंगे कि सोमवती अमावस पर गंगा स्नान की परंपरा होते हुए भी श्रद्धालु सोमवार को गंगा घाट अनेक से परहेज करते दिखे. कोरोना के चलते सोमवती अमावस का पर्व गंगा घाट पर बेरौनक ही गुजर गया.
सोमवती अमावस गंगा स्नान के लिए कम आए श्रद्धालु

वाराणसी . सोमवार के दिन अमावस की तिथि लगने पर इसे हिंदू सनातन धर्म में सोमवती अमावस का पावन पर्व के रूप में माना जाता है. इस दिन श्रद्धालु एवं व्रती गंगा के पावन जल मैं स्नान कर जरूरतमंदों को अनाज वस्त्र दान करके अपने जीवन को सुधारते हैं. किंतु कोरोना संक्रमण के कारण सोमवार को लगने वाली सोमवती अमावस के दिन वाराणसी के गंगा घाटों पर स्नान दान करने वालों की संख्या काफी कम रही. ज्यादातर काशी के गंगा घाट सूने सूने ही रहे. गिनती के श्रद्धालु ही सोमवती अमावस के दिन गंगा स्नान करने आए. श्रद्धालुओं की कम संख्या का असर गंगा घाट के दुकानदारों के चेहरे पर साफ झलकता दिखाई दिया.

इन दुकानदारों का कहना था कि पहले सोमवती अमावस के दिन जहां अच्छी खासी आमदनी हो जाया करती थी वहां अब कोरोना के चलते श्रद्धालु आने से परहेज कर रहे हैं जिससे उनकी आमदनी पर अच्छा-खासा प्रभाव पड़ है.

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आचार्य राम शास्त्री बताते हैं कि सोमवार का दिन महादेव का प्रिय दिन है. इस दिन अमावस पड़ने के कारण पौराणिक महत्व के अनुसार गंगा स्नान का विधान है. इस दिन गंगा जल में डुबकी लगाकर सूर्य को अर्घ देने से सुख समृद्धि के साथ ही पितरों का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है. व्रती महिलाएं पीपल के पेड़ में धागा बांधकर संतान और पति के लंबी उम्र की कामना करती हैं. बताते हैं कि पीपल के वृक्ष में भगवान विष्णु तने में भगवान शिव और अग्रभाग में भगवान ब्रह्मा का वास होता है. सोमवती अमावस के दिन पीपल देवता की पूजा करने से व्रतियों की मनोकामना पूर्ण होती है. यही नहीं अनाज और वस्त्र दान करके व्रतियों को पुण्य फल की प्राप्त होती है. बताते हैं कि कोरोना काल में सारे व्रत त्यौहार औपचारिकता पूर्ति करने वाले ही बनकर रह गए हैं.

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