वाराणसी : डॉक्टर मंगल देव का योगदान काशी विद्यापीठ के आया काम

Smart News Team, Last updated: 08/02/2021 01:09 PM IST
  • काशी विद्यापीठ स्थापना के शताब्दी वर्ष पर संस्थान को उत्तरोत्तर विकास के पथ पर पहुंचाने वाले लोगों को याद किया जा रहा है. इस क्रम में डॉक्टर मंगल देव के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता. उन्होंने समाज सुधारक संघ बनाकर काशी विद्यापीठ के शिक्षा को नई दिशा दी.
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (फाइल तस्वीर)

वाराणसी : काशी के शताब्दी वर्ष की यात्रा तक इसमें योगदान देने वाले डॉक्टर मंगल देव ने अपने अध्यापन के दौरान काशी विद्यापीठ में एक समाज सुधारक संघ बनाया था.इस संघ के माध्यम से उन्होंने समाज को एक नई सोच और दिशा प्रदान की. इस संघ में आचार्य नरेंद्र देव के अलावा विद्यापीठ के तमाम प्राध्यापक व उनके मित्र ठाकुर प्रसाद शर्मा शामिल थे. डॉक्टर मंगल देव ने साल 1924 में समाज सुधारक संघ का गठन किया था. 

इस मौके पर उन्होंने एक अंतर जाति भोज भी किया किया था. इस भोज में पंडित जवाहरलाल नेहरू जैसे तमाम दिग्गज नेता भी शामिल हुए थे. भोज की खासियत यह थी कि इसमें कोई महिला की सहभागिता नहीं थी. इसको लेकर पंडित जवाहरलाल नेहरू ने ध्यान भी आकर्षित कराया था. डॉक्टर मंगल देव का जन्म 1890 में बदायूं के प्रतिष्ठित और समाज परिवार में हुआ था. प्रारंभिक शिक्षा उर्दू फारसी से हुई. हालांकि उनका रुझान संस्कृत के प्रति शुरू से ही था. ऐसे में साल 1903 में अंग्रेजी स्कूल छोड़कर मंगल देव गुरुकुल पद्धति के विद्यालय में पढ़ने चले जाए. यहीं से उन्होंने 1909 में शास्त्री की उपाधि हासिल की. 

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भारतीय संस्कृति दर्शन तथा संस्कृत साहित्य के अध्ययन तथा प्रगतिशील विचारक डॉ मंगल देव आचार्य नरेंद्र देव के खास सहयोगी थे। साल 1922 में ऑक्सफोर्ड से बीफिल की उपाधि हासिल कर वह अपने मित्र आचार्य नरेंद्र देव के आग्रह पर साल 1923 में काशी विद्यापीठ से जुड़ गए और अध्यापन का कार्य करने लगे. अपनी गुणवत्ता परक शिक्षा और सामाजिक क्रियाकलापों में अभिरुचि के चलते उन्होंने काशी विद्यापीठ को निरंतर प्रगति ऊंचाइयों पर पहुंचाने भरपूर योगदान दिया.

 

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