Dwijapriya Sankashti Chaturthi: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी आज, जानें पूजा विधि, नियम और कथा

Pallawi Kumari, Last updated: Sun, 20th Feb 2022, 8:54 AM IST
  • आज रविवार को द्विजप्रिय संकष्ट्री चतुर्थी व्रत रखा जाएगा. आज के दिन भगवान गणेश के 32 रूपों में छठवें स्वरूप की पूजा की जाती है. आज के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है. विघ्नहर्ता आपके सारे संकटों को दूर कर देते हैं.
संकष्टी चतुर्थी (फोटो-सोशल मीडिया)

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत हिंदू कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. इस बार ये व्रत रविवार, 20 फरवरी 2022 को रखा जाएगा. हर चतुर्थी की तरह द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी में भी भगवान गणेश की पूजा अराधना की जाती है. लेकिन मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश के 32 रूपों में से उनके छठे स्वरूप की पूजा की जाती है. संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से भगवान गणेश प्रसन्न होकर आपको मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद देते हैं और अपने भक्तों के सारे संकटों को दूर करते है.

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के लिए कथा पाठ का विशेष महत्व होता है. इसलिए संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए. आइये जानते हैं आज क्या है द्विजप्रिय संकष्टी व्रत व पूजन का सही मुहूर्त और रात्रि में कैसे क्यों की जाती है आज चंद्रमा की पूजा.

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द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पूजा मुहूर्त

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत- रविवार, 20 फरवरी 2022

चतुर्थी तिथि आरंभ- शनिवार,19 फरवरी रात्रि 9 बजकर 56 मिनट से

चतुर्थि तिथि समाप्त- रविवार, 20 फरवरी रात्रि 9 बजकर 05 मिनट पर

चंद्रोदय का समय-9 बजकर 50 मिनट पर

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि-

1. सुबह उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें,

2. भगवान के मंदिर में एक दीपक जलाएं और सबसे पहले व्रत का पारण लें.

3. फिर गणेश भगवान की प्रतिमा या फोटो को उत्तर दिशा की तरफ मुंह करके तिल डालकर जल अर्पित करें.

4.दिन भर व्रत रखें और शाम को विधि-विधान से भगवान की पूजा करें.

5. पूजा में धुर्वा, फल और लड्डू जरूर चढ़ाएं.

6. संकष्टी चतुर्थी के व्रत कथा का पाठ जरूर करें और आखिर में आरती करें.

7. शाम को चंद्रोदय होने के बाद अर्घ्य देकर पूजा करें.

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