वाराणसी : समय पर सब्जी फसल की बुवाई कर बेहतर लाभ पा सकते हैं किसान

Smart News Team, Last updated: Thu, 4th Feb 2021, 1:07 PM IST
  • खेती किसानी करने में समय का विशेष महत्व होता है, समय पर सब्जी फसलों की बुवाई कर किसान बेहतर लाभ उठा सकते हैं. इसके लिए समय-समय पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह भी अपनानी आवश्यक होती है.
समय पर सब्जी फसल की बुवाई कर बेहतर लाभ पा सकते हैं किसान (प्रतीकात्मक तस्वीर)

वाराणसी : सोनभद्र जिले के जिला कृषि अधिकारी पीयूष राय ने किसानों को सब्जियों की खेती करने के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी. उन्होंने बताया कि टमाटर मिर्च मूली गाजर प्याज लोबिया राजमा और भिंडी की खेती कर किसान अच्छा-खासा मुनाफा कमा सकते हैं. इन फसलों की बुवाई किसान हर हाल में फरवरी माह तक कर दे. उन्होंने किसानों को जानकारी देते हुए बताया कि प्याज की रोपाई फरवरी के अंतिम सप्ताह तक की जा सकती है. तैयार किए गए खेत में उर्वरक डालें. सिंचाई के लिए क्या रिया तैयार करें. क्यारियों में 10 से 20 सेंटीमीटर की दूरी पर रोपाई करें. रोपाई शाम के समय करना ज्यादा उचित रहता है.

प्याज की रोपाई करने के ठीक बाद सिंचाई कर दे. मूली और गाजर की फसल तैयार करने के संबंध में जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि पूसा हिमानी मूली किस्म दिसंबर से फरवरी तक लगा सकते हैं. यह फसल 40 से 70 दिन में तैयार हो जाती है. जापानी वाइट मूली खेत में है तो सिंचाई तथा गुड़ाई समय-समय पर करें. खरपतवार को बिल्कुल न पनपने दें. मूली और गाजर की फसल को उखाड़ने के दो-तीन दिन पहले खेत की सिंचाई कर दें. फसलों को उखाड़ने में देरी ना करें देरी से फसलों की गुणवत्ता खराब होने की संभावना रहती है. जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि मिर्च की बुवाई करते समय पौधों के बीच 18 इंच की दूरी रखने से फसल की पैदावार अच्छी होती है.

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 बताया कि रोपाई से पूर्व तकरीबन 1 हेक्टेयर खेत में 100 कुंतल गोबर की खाद एक बोरी यूरिया 1.7 बोरा सिंगल सुपर फास्फेट तथा एक बोरा म्यूरेट आफ पोटाश डालें. सर्दियों में 10 से 17 दिन बाद हल्की सिंचाई से फूल व फल गिरते नहीं है तथा फसल पहले से भी बची रहती है. उन्होंने बताया कि टमाटर को पाले से बचाव करना जरूरी होता है. इसके लिए टमाटर की पौध लगाने के बाद प्रत्येक 10 दिन बाद हल्की सिंचाई किसान करते रहें. खरपतवार ना होने दें.पुरानी फसल में यदि फलों बा छेदा का संक्रमण हो जाए तो खराब फलों को तुरंत तोड़ कर नष्ट कर दें. यदि संक्रमण ज्यादा है तो एक हेक्टेयर खेत में 0.1 प्रतिशत मेलाथियान या 0.1% थायोडान का 15-15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें.

 

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