सेंट थॉमस चर्च से जुड़ा है प्रभु यीशु के शिष्य का इतिहास

Smart News Team, Last updated: Thu, 17th Dec 2020, 11:23 PM IST
  • प्रभु यीशु मसीह के चुनिंदा शिष्यों में से एक सेंट थामस पहली सदी की शुरुआत में बनारस आए और उन्होंने यहां गंगा किनारे मैदान में प्रभु यीशु की आराधना भी की थी.
फाइल फोटो

वाराणसी . शहर के गोदौलिया जाने के दौरान गोदौलिया चौराहे से पहले पड़ने वाले गिरजाघर चौराहा के नाम से ऐसे ही प्रसिद्ध नहीं है. पास स्थित सेंट थॉमस गिरजाघर का इतिहास बहुत ही पुराना और प्रभु यीशु के शिष्य से जुड़ा हुआ है. बताते हैं कि प्रभु यीशु मसीह के चुनिंदा शिष्यों में से एक सेंट थामस पहली सदी की शुरुआत में बनारस आए और उन्होंने यहां गंगा किनारे मैदान में प्रभु यीशु की आराधना भी की थी. जिस स्थान को उन्होंने ब्लेस्ड किया था, उसका जिक्र उनके सफरनामे में है. 17वीं शताब्दी के दौरान वह पत्र किसी ब्रिटिश सैनिक के हाथ लगा.उसमें दर्ज नक्शे के आधार पर उसी स्थान पर ईसाई मिशनरी ने गिरजाघर का निर्माण कराया, जिसे सेंट थामस का ही नाम दिया गया. कहा जाता है कि भारत के लोगों ने प्रभु यीशु के उपदेश व उनके बारे में शुरुआती दौर में जो कुछ भी जाना, उसके पीछे सेंट थामस की मेहनत रही.

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किंवदंती के अनुसार प्रभु यीशु के 12 शिष्य थे, जो दुनिया के अलग-अलग देशों में धर्म प्रचार को निकल पड़े थे. इनमें से एक सेंट थामस थे.वे जब धर्म प्रचार के लिए समुद्र के रास्ते आये तो उनकी नौका मद्रास के तट पर लगी. इसके बाद उन्होंने वहां रहकर ईसाई धर्म का प्रचार शुरू कर दिया. उनकी मेहनत से ईसाई धर्म के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए वहां के प्रभावशाली लोगों को यह नागवार गुजरा तो वे उनके खिलाफ हो गए और उन पर तरह-तरह के जुल्म शुरू कर दिया. नतीजा यह हुआ कि बाद में एक दिन उनका कत्ल कर दिया गया. सेंट थामस गिरजाघर के पादरी न्यूटन स्टीवंस ने बताया कि ऐसा माना जाता है कि मृत्यु से पहले वह बनारस भी आये थे. ईसाई मिशनरी ने उनके सम्मान में ही यहां गिरजाघर बनवाया.

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