रिहंद बांध के पानी में प्रदूषण की जांच करेगा सिंचाई विभाग

Smart News Team, Last updated: 15/12/2020 06:44 PM IST
  • सिंचाई विभाग ने देश के प्रमुख रिहंद बांध के पानी में प्रदूषण की जांच कराने का निर्णय लिया है. इसके लिए विभाग की ओर से 70 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे. पानी में प्रदूषण की जांच के लिए सिंचाई विभाग ने सीडब्ल्यूपीआरएस कार्यदाई संस्था को जिम्मेदारी सौंपी है.
पानी में प्रदूषण की जांच के लिए सिंचाई विभाग ने सीडब्ल्यूपीआरएस कार्यदाई संस्था को जिम्मेदारी सौंपी है

वाराणसी . बता दें कि देश के प्रमुख बांधों में शामिल रिहंद बांध यानी गोविंद बल्लभ पंत सागर डैम के पानी की गुणवत्ता में कमी आई है. इस बांध के पानी में आसपास की कंपनियों के कारखानों से दूषित जल भी मिल रहा है. यही नहीं सोनभद्र जिले के कई नाले भी इसी बांध के पानी में गिर रहे हैं. इससे दिनों दिन बांध के पानी की गुणवत्ता खराब होती जा रही है. बांध की जल धारण क्षमता भी प्रभावित हुई है. करीब 180 वर्ग मील में फैले रिहंद बांध के पानी की सीमाएं यूपी के साथ मध्य प्रदेश से भी क्षति हुई है. इस बांध के इर्द-गिर्द कई औद्योगिक इकाइयां भी है. इन इकाइयों से लगातार कई वर्षों से पानी के साथ कचरा बांध के पानी में मिल रहा है. इससे बांध के पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

इसी के मद्देनजर सिंचाई विभाग ने 70 लाख रुपए की धनराशि से डैम के पानी के प्रदूषण की जांच कराए जाने का निर्णय लिया है. इसके लिए सिंचाई विभाग ने सेंट्रल वॉटर एंड पावर रिसर्च स्टेशन यानी सीडब्ल्यूपीआरएस को प्रदूषण की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी है. चाई विभाग की ओर से उक्त धनराशि कार्यदाई संस्था को हस्तांतरित कर दी गई है. मामूली औपचारिकताएं शेष है जिसे पूरी कर जल्द ही प्रदूषण जांच की कार्यवाही शुरू की जाएगी. जांच रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी को भेजी जाएगी.

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पुणे की कार्यदाई संस्था सीडब्ल्यूपीआरएस बांध की तलहटी में कितना सिल्ट है, कौन-कौन सी औद्योगिक इकाइयों का दूषित पानी और कचरा बांध के पानी में गिराया जा रहा है, बांध के पानी में प्रदूषण के कौन-कौन से तत्व मौजूद हैं, इन सब बिंदुओं पर जांच करेगी कार्यदाई संस्था के कर्मचारी तकरीबन एक महीना तक जांच कार्य करेंगे और उसकी रिपोर्ट उच्च स्तर को प्रेषित करेंगे.

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