आईआरआरआई- सार्क ने दिया कम पानी की धान प्रजाति विकसित करने पर जोर

Smart News Team, Last updated: Mon, 22nd Feb 2021, 4:19 PM IST
  • वाराणसी के अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान यानी आईआरआरआई और दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र यानी सार्क केंद्र पर कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली धान की प्रजाति को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है. 
आईआरआरआई- सार्क ने दिया कम पानी की धान प्रजाति विकसित करने पर जोर (प्रतीकात्मक तस्वीर)

वाराणसी: जलवायु परिवर्तन के कारण किसानों को फसलों का नुकसान उठाना पड़ रहा है. ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों की चुनौती बढ़ गई है. कृषि वैज्ञानिक कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली धान की किस्म की खोज करें. यह बात आईआरआरआई सार्क के निदेशक डॉ सुधांशु सिंह ने कही. उन्होंने बताया कि वाराणसी केंद्र पर जन्म दर्जन भर से अधिक धान की प्रजातियों पर शोध चल रहा है. इसके अलावा प्रदेश के विभिन्न जनपदों में भी इसको लेकर ट्रायल चल रहा है. आई आर आर आई सार्क के निदेशक डॉ सुधांशु सिंह बताते हैं कि चावल की गुणवत्ता में सुधार और पूरा संस्कृत चावल उत्पादों को विकसित करने के लिए जिंक व आयरन के बिंदुओं पर शोध चल रहा है. इसमें काफी हद तक सफलता मिली है. 

उन्होंने बताया कि चावल की पौष्टिकता में वृद्धि करने के लिए मिरक्रोनुट्रिएंट जैसे आयरन और जिंक की मात्रा बढ़ाने के साथ ही उसे शुगर फ्री प्रजाति का बनाने का भी काम शुरू कर दिया गया है. उन्होंने बताया कि प्रत्येक मौसम में धान की नर्सरी तैयार करने के लिए अनुसंधान चल रहा है. स्पीड रीडिंग फैसिलिटी को स्थापित करने का भी काम किया जा रहा है. जिसके द्वारा कम समय में ही धान की नई प्रजातियां तैयार की जाएंगी. बताया कि स्पीड रीडिंग फैसिलिटी से धान की तीन से चार पीढ़ियों की पैदावार 1 वर्ष में ही की जा सकेगी. उन्होंने बताया कि किसानों के लिए धान के पुआल की समस्या बनी रहती है.

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प्रशासन की ओर से इसे जलाने पर पाबंदी लगाई गई है. ऐसे में कुछ ऐसी तकनीकों का प्रचार प्रसार करेंगे जिससे कम समय में अतिरिक्त पुआल का खेत अथवा खेत से बाहर लाकर फायदेमंद रूप में प्रबंधन किया जा सके. उन्होंने बताया कि उन्नत बिल्डिंग तकनीक से क्षेत्र की अच्छी गुणवत्ता के लिए मशहूर धान की प्रजातियों की लंबाई कम करके एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करके उत्पादन बढ़ाया जा रहा है. इसमें यहां का मशहूर जीरा 32 एवं चंदौली का ब्लैक राइस भी शामिल है. बताया कि धान की पैदावार में पानी का अधिक इस्तेमाल एक बड़ी समस्या का रूप ले चुकी है. इस समस्या को दूर करने के लिए केंद्र पर धान की ऐसी प्रजाति पर शोध जारी है जो कम पानी में भी अधिक पैदावार देने वाली साबित होगी.

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