रूस के स्कोप डांस का जन्मदाता है काशी, दिवंगत उदय शंकर को श्रेय

Smart News Team, Last updated: 08/12/2020 07:22 PM IST
  • रूस और विश्व के अनेक देशों में प्रचलित स्कोप डांस का जन्म काशी की ही गलियों में हुआ है. भरतनाट्यम व अन्य कलात्मक नृत्य के संगम से मिलकर बनाने वाले संगीत विधा के शख्सियत दिवंगत उदय शंकर ने स्कोप डांस से पूरे विश्व को परिचय कराया था. उदय शंकर को भारतीय आधुनिक नृत्य कला का जन्मदाता भी माना जाता है.
संगीत के क्षेत्र में ध्रुव तारा कहे जाने वाले उदय शंकर जी

वाराणसी . संगीत के क्षेत्र में ध्रुव तारा कहे जाने वाले उदय शंकर का जन्म 8 दिसंबर 1900 ईस्वी को हुआ था. मूल रूप से पश्चिम बंगाल के कोलकाता में जन्मे उदय शंकर ने स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद बनारस के बंगाली टोला में रहकर संगीत की शिक्षा प्राप्त की. गंगा घाट के किनारों और काशी की गलियों में बस कर उदय शंकर ने न केवल भारतीय आधुनिक नृत्य कला को जन्म दिया बल्कि भरतनाट्यम और अन्य कलात्मक नृत्यों के विविध सुरों को मिलाकर एक नए संगीत की उत्पत्ति की जिसे स्कोप डांस के नाम से जाना गया. उस जमाने में पूरे स्कोप डांस की रचना कर नृत्य की एक अलग विधा बनाकर उदय शंकर ने पेश की जिसे पूरे विश्व के संगीत प्रेमियों ने न केवल सराहा बल्कि रूस जैसे तमाम देशों ने इससे अपने देश के नृत्यों की सूची में शामिल भी कर लिया.

नुसरतपुर के बुजुर्ग रामधनी यादव बताते हैं कि गांव में उदय शंकर का परिवार बंगाली बाबू के नाम से जाना जाता था. गांव का मकान अब जर्जर हो चुका है. बताते हैं कि उदय शंकर के चार भाई थे जिसमें सबसे बड़े भाई देवेंद्र शंकर गांव में ही रहते थे जबकि छोटे भाई भारत रत्न से पुरस्कृत रवि शंकर राष्ट्रीय स्तर के सितार वादक बने वही उनसे छोटे भूपेंद्र शंकर एवं राजेंद्र शंकर ने भी गीत संगीत में अपना पूरा जीवन अर्पित कर दिया था. रामधनी बताते हैं कि उदय शंकर के पिता श्याम शंकर बनारस में वकील थे तथा उनकी माता हेमांगनी देवी एक ग्रहणी थी.

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वही उदय शंकर के काफी करीबी रहे अमित भट्टाचार्य बताते हैं कि उदय शंकर 13 साल तक तिलभांडेश्वर मैं बंगाली टोला स्कूल के पास रहते थे और यही वह छड़ था जब संगीत सेवर नृत्य की परंपरा में आए. काशी में उनके गुरु पंडित चंद्रशेखर शास्त्री ने उन्हें संस्कृत के अलावा हिंदी में पारंगत किया. उदय शंकर की मृत्यु 26 सितंबर 1977 को हुई.

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