लॉकडाउन में नौकरी गंवाई, अब मशरूम की खेती से कर रहे कमाई

Smart News Team, Last updated: Sun, 27th Dec 2020, 12:49 PM IST
जफराबाद के कौशल श्रीवास्तव भी हैं. जिन्होंने लॉकडाउन के दौरान हाथ से छूटी नौकरी पर अफसोस न करते हुए मशरूम की खेती कर ना केवल मोटा मुनाफा कमाने की ओर कदम बढ़ा दिया है बल्कि अपने आसपास के क्षेत्र में नजीर बन कर भी उभरे हैं.
फाइल फोटो

वाराणसी. बता दें कि लॉकडाउन के पहले काशी से सटे गांव जफराबाद के रहने वाले कौशल श्रीवास्तव तमिलनाडु राज्य के इरोड की कपड़े की फैक्ट्री में सहायक प्रबंधक के पद पर नौकरी कर बड़े आराम से अपने परिवार की गाड़ी चला रहे थे. अपनी नौकरी से कौशल किशोर को हर महीने 65000 की पगार भी मिलती थी. उसी दौरान कोविड-19 का संक्रमण फैला तो देशभर में संपूर्ण लॉकडाउन लगा दिया गया. इस लॉक डाउन का कौशल श्रीवास्तव की नौकरी पर सीधा असर पड़ा. शुरुआती दौर में 65000 मासिक वेतन की जगह कंपनी की ओर से कटौती कर 21000 तनख्वाह के रूप में उनके हाथ पर रखी गई. बाद में पगार की यह रकम भी कम होती चली गई. स्थिति यह हो गई कि कौशल श्रीवास्तव के हाथ से नौकरी भी निकल गई. मजबूरन परदेस छोड़कर कौशल को अपने गांव वापस लौटना पड़ा. नौकरी छूटने से आर्थिक संकट उनके सामने मुंह फाड़े खड़ा हुआ था. ऐसी सूरत में कुछ तो करना था, यही सोच कर कौशल श्रीवास्तव ने गांव में पड़ी अपनी जमीन पर मशरूम की खेती करने की ठानी. फिर क्या था कानपुर के एक प्रशिक्षण संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त कर कौशल ने घर के दरवाजे पर पड़े अपने प्लॉट पर ही मशरूम की खेती करना शुरू किया.

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प्लाट को साफ कर उसे खुद ही खेती लायक बनाया फिर उसमें एक झोपड़ी भी बनाई. दिल्ली से मशरूम के बीज भी मंगाए. खाद बीज और खेती लायक जमीन करने में कौशल के तकरीबन दो लाख रुपए खर्च हो गए. अक्टूबर माह में मशरूम के कौशल ने अपने प्लॉट पर बीज रोपित कर दिए. कौशल बताते हैं कि जनवरी माह के प्रथम सप्ताह से मशरूम की फसल मुनाफा देना शुरू कर देगी, यह सिलसिला मार्च माह तक चलेगा. फसल को बड़े शहरों में बेचने की योजना है. इस फसल में 20 फ़ीसदी से अधिक तक का मुनाफा होने का अनुमान है. यदि सब कुछ सही रहा तो इस खेती को वृहद स्तर पर तो करेंगे ही साथ ही पशुपालन व्यवसाय से भी जुड़कर आगे बढ़ेंगे. आज स्थिति यह है कि कौशल श्रीवास्तव की मशरूम की खेती देखने लायक है. उनके जज्बे से प्रेरित होकर गांव के ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्र के तमाम किसान इस खेती को अपनाने के लिए उनसे मिल रहे हैं और जानकारी हासिल कर रहे हैं. यह सच है कि लॉकडाउन में नौकरी गंवाने के बाद कौशल किशोर आज अपने आसपास के क्षेत्र लोगों के बीच नजीर बन चुके हैं.

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