महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने देश को लाल बहादुर शास्त्री जैसा दिया लाल

Smart News Team, Last updated: Sat, 6th Feb 2021, 12:55 PM IST
  • असहयोग आंदोलन की भक्ति से तप कर निकले महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की ऐतिहासिकता और गुणवत्ता का इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस विद्यापीठ ने देश को न केवल लाल बहादुर शास्त्री जैसे लाल दिए बल्कि देश को पहला दलित मुख्यमंत्री भी दिया है.
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ (फाइल तस्वीर)

वाराणसी : काशी विद्यापीठ स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर इसके अभूतपूर्व इतिहास को याद किया जा रहा है. ब्रिटिश हुकूमत के विरोध में शुरू किए गए असहयोग आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी के हाथों से रोपित किया गया काशी विद्यापीठ रूपी पौधा आज विशाल वटवृक्ष बन गया है. विद्या के इस प्राचीन मंदिर ने देश को लाल बहादुर शास्त्री जैसा ईमानदार प्रधानमंत्री ही नहीं दिया बल्कि देश को पहला दलित मुख्यमंत्री भी दिया. इतना ही नहीं महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से तमाम दिग्गज नेता पढ़कर निकले जिन्होंने अपनी साफ-सुथरी छवि वाज नेतृत्व कुशलता के बल पर देश को एक नई दिशा दी. 

बिहार राज्य के तीन बार मुख्यमंत्री रहे भोला पासवान शास्त्री देश के प्रथम दलित मुख्यमंत्री थे. भोला पासवान शास्त्री ने भी साल 1938 में काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि हासिल की थी. भोला पासवान का जन्म 21 सितंबर 1914 को बिहार के पूर्णिया जिले के बैरगाछी गांव में एक साधारण दलित परिवार में हुआ था. उनके पिता दूसर पासवान दरभंगा महाराज के राजा कोठी कचहरी में एक सिपाही के रूप में कार्यरत थे. उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई. अध्ययन के दौरान वह महात्मा गांधी की विचारधारा से काफी प्रभावित हुए. 

वाराणसी : ठंड के मौसम में टहलने से बचे सांस व दिल के मरीज

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बैजनाथ चौधरी के संपर्क में आने के बाद वह अपने आपको रोक ना सके और स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े. जेल जाने के कारण साल 1930 में उन्हें हाई स्कूल की परीक्षा भी छोड़नी पड़ी.डॉ राजेंद्र प्रसाद की सलाह पर हुए वर्ष 1935 में जब काशी विद्यापीठ में दाखिला लेने आए तो उनके पास हाई स्कूल का प्रमाण पत्र नहीं था. ऐसे हालात में विद्या पीठ ने उनका हिंदी व अंग्रेजी का टेस्ट लिया और उत्तर हो जाने के बाद उन्हें दाखिला दिया. कैंसर से पीड़ित होकर 9 सितंबर 1984 को उनका निधन हो गया.

 

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें