मकर संक्रांति : खिचड़ी के चार यार दही गुड़ और पापड़ अचार

Smart News Team, Last updated: Wed, 4th Aug 2021, 10:46 PM IST
  • भारतीय संस्कृति में मकर संक्रांति का पर्व दान के अलावा स्नान और भोजन में भी सार्थक बदलाव लेकर आता है. इस पर्व पर स्नान दान के बाद खान का महत्व है. भोजन में इस पर्व पर नए चावल की खिचड़ी खाने की महत्ता है.
मकर संक्रांति पर क्यैा करें दान.

वाराणसी :भारती संस्कृति में मकर संक्रांति का पर्व दान के अलावा स्नान और भोजन में भी सार्थक बदलाव लेकर आता है. इस पर्व पर स्नान दान के बाद खान का महत्व है. भोजन में इस पर्व पर नए चावल की खिचड़ी खाने की महत्ता है. आपको पता है कि खिचड़ी के चार पूरक खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें खिचड़ी का यार कहते हैं.

 मकर संक्रांति पर दही गुड़ और पापड़ अचार अनुपूरक पदार्थों के बगैर खिचड़ी बेस्वाद सी लगती है. सर्दी के मौसम में खासकर मकर संक्रांति के पर्व पर खिचड़ी के साथ उक्त अनुपूरक खाद्य पदार्थों का सेवन स्वाद में वृद्धि के साथ ही शरीर के लिए बेहद लाभकारी साबित होता है. भारतीय आध्यात्मिक के साथ चिकित्सा कारण भी है, इस दिन खाए जाने वाला खाद्य पदार्थ पौष्टिक होने के साथ ही शरीर को गर्म रखने वाला भी होता है. इसके अलावा तिल और गुड़ शरीर की सेहत के लिए बेहद लाभकारी होता है. इसी दिन उड़द की दाल का भी सेवन किया जाना भी शुभ माना गया है. उड़द की दाल, मूंगफली भी शरीर के पाचक अंगों को दुरुस्त करने में सहायक होती है.

 मकर संक्रांति के पर्व पर तिल का भी विशेष महत्व है. इस दिन भले ही पापड़ अचार ना खाया जाए किंतु किसी न किसी रूप में तिल का सेवन जरूर किया जाता है. इस कारण कई जगहों पर इस दिन को तिल के महत्व के कारण तिल संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है. चिकित्सा जगत भी तिल के सेवन को शरीर के लिए लाभदायक बताता है. विशेषज्ञों की मानें तो तेल हमारे शरीर में एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करने के साथ ही इम्यूनिटी बढ़ाने में भी सहायक होता है और यह सर्दी के मौसम में हमारे शरीर को गर्म भी रखता है.

काशी के कई चिकित्सक एवं पंचकर्म विभाग के डॉ अजय कुमार बताते हैं कि आयुर्वेद के अनुसार हेमंत ऋतु के बाद शिष्यवृत्ती का प्रारंभ होता है जिसमें ठंडी हवा वर्षा का अधिक प्रकोप रहता है. ठंडी हवा से हमारे शरीर में रूखापन बढ़ता है. ऐसी स्थिति में तिल गुड़, मूंगफली का सेवन करना बेहतर होता है क्योंकि इनमें पौष्टिक तत्वों के अलावा बसा का भी संचय होता है जो हमारे शरीर के रूखापन को दूर करने में सहायक होते हैं.

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