वाराणसी : अब जर्मन तकनीक अपनाकर रोका जाएगा गंगा में पॉलिथीन का प्रभाव

Smart News Team, Last updated: 08/02/2021 01:24 PM IST
  • वाराणसी नगर निगम प्रशासन ने जर्मन तकनीक अपनाकर गंगा समय सहायक नदियों व अन्य जल स्रोतों में ठोस कचरा प्रभावित होने से रोकने के लिए नालों को ढकने एवं उनके मुहाने पर जाली लगाने की योजना बनाई है. वीएमसी की ओर से यह प्लान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी के निर्देश पर बनाया जा रहा है.
गंगा (फाइल तस्वीर)

वाराणसी : इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए नगर आयुक्त गौरांग राठी ने अपर नायक नगर आयुक्त देवी दयाल वर्मा को सौंपी है. योजना का पूरा कार्य अपर नगर आयुक्त के निर्देशन में नगर निगम के सामान्य इंजीनियर विभाग करेगा. बता दें कि मौजूदा समय में शहरी क्षेत्र में गंगा के दोनों किनारों पर पांच नारे गिरते हैं. इसमें दो ना ले इस पार तथा तीन नाले रामनगर इलाके से गंगा के उस पार के है. इन नालों से करीब 7 एमएलडी गंगा में गंदगी गिरती है. जिसे रोकने के लिए रमुना में 50 एमएलए शोधन क्षमता का एसटीपी निर्माणाधीन है. 

वही रामनगर में 10 एमएलडी शोधन क्षमता का एसटीपी का निर्माण कराया जा रहा है. इन दोनों प्लांटों से गंगा में गिरते इन नालों को जोड़ दिया जाएगा. लेकिन हाल फिलहाल इन प्लांटों के कार्य करने में देरी है. इसे देखते हुए नगर निगम ने गंगा में गिरने वाले नालों को ढकने के साथ ही इनके मुहाने पर जाली लगाकर नालों के माध्यम से गंगा में ठोस कचरा एवं पॉलीथिन को गिरने से रोकने की तैयारी की.

वाराणसी : डॉक्टर मंगल देव का योगदान काशी विद्यापीठ के आया काम

इस संबंध में वाराणसी नगर निगम के अपर नगर आयुक्त देवीदयाल वर्मा ने बताया कि गंगा में गिरने वाले नालों के मुहाने पर जाली लगाने के साथ ही उन्हें ढकने के लिए योजना बना ली गई है. जल स्रोत में ठोस कचरा ना प्रभावित हो इसके लिए जर्मन तकनीक अपनाई जा रही है जो स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर अंक पाने के लिए भी सहायक साबित होगी.

 

आज का अखबार नहीं पढ़ पाए हैं।हिन्दुस्तान का ePaper पढ़ें |

अन्य खबरें