संपूर्णानंद विवि. में संस्कृत के प्रति युवा छात्र-छात्राओं की कम हो रही अभिरुचि

Smart News Team, Last updated: 14/10/2020 03:28 PM IST
  • कोरोना महाकाल कहें या इसे पौराणिक व अध्यात्मिक भाषा संस्कृत के प्रति युवा छात्र-छात्राओं की दिन-ब-दिन कम होती जा रही अभिरुचि समझा जाए महानगर में स्थित संपूर्णानंद विश्वविद्यालय इसका जीता जागता प्रमाण है. 
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 5 विभागों में प्रवेश लेने को एक भी आवेदन नहीं आए

वाराणसी . संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में मध्यमा कोमा उत्तर मध्यमा, शास्त्री व आचार्य स्तर के विभिन्न विषयों के कक्षाएं संचालित होती हैं. पिछले दो दशक पहले जहां इस विश्वविद्यालय में जहां देश के ही नहीं बल्कि विदेशों से भी छात्र यहां आध्यात्मिक शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते थे. पश्चिमी देशों की चकाचौंध मैं संपूर्णानंद विश्वविद्यालय वाराणसी की संस्कृत शिक्षा से छात्र-छात्राएं दूर होते जा रहे हैं.

साल 2000-21 के शैक्षणिक सत्र में जहां कोरोना वायरस ने शिक्षा को चौपट कर रखा है वही संस्कृत से दूर होते जा रहे छात्र-छात्राओं ने भी इस विश्वविद्यालय से दूरी बना रखी है. मौजूदा सत्र में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 5 विभागों में प्रवेश लेने को एक भी आवेदन नहीं आए हैं वही शास्त्री और आचार्य कक्षाओं की शिक्षा के लिए अब तक प्रवेश लेने को 574 छात्र छात्राओं ने विश्वविद्यालय में अपना आवेदन किया है. इसमें शास्त्री प्रथम वर्ष में 293 व आचार्य प्रथम वर्ष में 281 छात्र छात्राओं ने अपने आवेदन किए हैं. जबकि 400 से अधिक छात्र छात्राओं ने प्रवेश फार्म लेने के बाद भी आवेदन संबंधित सन कानों में जमा नहीं किए हैं.

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इस सत्र में शास्त्री डिग्री के लिए ज्योतिष क्षेत्र में 5, प्राचीन व्याकरण के क्षेत्र में दो, साहित्य के क्षेत्र में 81, पुराण इतिहास के लिए 1, प्राचीन राज अर्थ में 1, वेदांत में 2, धर्मशास्त्र में साथ संस्कृत विद्या में नो भाषा विज्ञान में 1 छात्र ने प्रवेश के लिए विश्वविद्यालय में अपना आवेदन किया है. इसके अलावा न्याय वैशेषिक, योग तंत्रगम, बौद्ध दर्शन, प्राकृत एवं जैनागम संकायों के लिए आरक्षित 60-60 सीटों के सापेक्ष एक भी आवेदन विश्वविद्यालय को प्राप्त नहीं हुआ है. जबकि इन सभी संकायों मैं प्रवेश के लिए विश्वविद्यालय की ओर से 15 अक्टूबर तक काउंसलिंग कराने की तिथि निर्धारित की गई थी. आवेदन प्राप्त ना होने की सूरत में विश्वविद्यालय की ओर से प्रवेश समिति से विचार-विमर्श के बाद प्रवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाए जाने की बात कही जा रही है.

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