बीएचयू में अब कौटिल्य के राजधर्म और गांधी के रामराज्य के बारे में पढ़ेंगे छात्र

Smart News Team, Last updated: 07/12/2020 07:13 PM IST
  • इसके तहत छात्रों को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, आधारभूत विकास, स्वर्णिम चतुर्भुज योजना, आयात-निर्यात, पोखरण आदि से जुड़े प्रसंगों को पाठ्यक्रम के रूप में ढाला जाएगा.
फाइल फोटो

वाराणसी. बीएचयू के प्रस्तावित अटल अध्यन केंद्र में छात्रों को कौटिल्य के राज धर्म और महात्मा गांधी के राम राज्य के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिलेगा. यही नहीं इस सेंटर के जरिये छात्रों को रोजगार से भी जोड़ा जाएगा. भारत सरकार और दिल्ली पीएमओ ने बीएचयू के प्रस्तावित अटल अध्ययन केंद्र में दिलचस्पी दिखाते हुए इसका विवरण माँग लिया है जिस पर अब दिल्ली में विस्तृत चर्चा की जाएगी और फिर इसकी रूपरेखा तैयार की जाएगी.

बीएचयू के सामाजिक विज्ञान संकाय में अटल अध्ययन केंद्र के लिए संकाय प्रमुख प्रो. कौशल किशोर मिश्रा की अध्यक्षता में दस सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है, जो कि पाठ्यक्रम तैयार करेगी.इस कमेटी में इतिहास, वाणिज्य, सामाजिक विज्ञान, हिदी, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र और मालवीय रिसर्च के प्रोफेसरों को शामिल किया गया है. प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है जिसको जल्द एकेडमिक काउंसिल से पारित करा लिया जाएगा.

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बीएचयू के सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन से रविवार को इस सेंटर के कांसेप्ट व रूपरेखा सहित पूरा पूरा विवरण मांगा गया है. इस पर अब दिल्ली में विधिवत चर्चा होगी. बीएचयू में इस केंद्र के जरिये राजधर्म और रामराज्य के बारे में शिक्षा दी जाएगी. इस केंद्र में छात्रों को कौटिल्य के राजधर्म और महात्मा गांधी के रामराज्य पर एक व्यापक दृष्टि दी जाएगी व उन्हें नौकरी के लिए आवश्यक कौशल भी प्रदान किया जाएगा.इसके अलावा 'गीता और स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन का सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य', '2014 के बाद से हिदुत्व का विचार और विस्तार', 'पूंजीवाद और मा‌र्क्सवाद के बीच भारतीय मिश्रित अर्थव्यवस्था' पर भी विधिवत कक्षाएं संचालित होंगीं और जरूरी विजिट कराकर इसका एक व्यावहारिक रूप भी छात्रों को बताया जाएगा. इसके तहत छात्रों को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, आधारभूत विकास, स्वर्णिम चतुर्भुज योजना, आयात-निर्यात, पोखरण आदि से जुड़े प्रसंगों को पाठ्यक्रम के रूप में ढाला जाएगा.

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इस बारे में डीन प्रो. कौशल किशोर मिश्रा ने बताया कि इससे छात्रों को जमीनी तौर पर ज्ञान मिलेगा और अब तक सबसे प्रभावी रोजगार सृजन होगा. इसके अलावा नीति-निर्माण और क्रियान्वयन के तमाम पहलुओं और उत्थान की सफल कहानियों से छात्र प्रेरित होंगे. उन्हें हिदू पुनर्जागरण के इस दौर में छात्रों को यह मालूम होना चाहिए कि ताजा दौर में देश किस सामाजिक क्रांति या आंदोलन के दौर से गुजर रहा है.

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